सात करोड़ का धान खाने वाला मूसवा कहां है? —अमित जोगी

छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में कथित धान घोटाले को लेकर सियासत चरम पर है। बाजार चारभाठा धान संग्रहण केंद्र से 22 हजार क्विंटल से अधिक धान के गायब होने और इसकी जिम्मेदारी चूहों (छत्तीसगढ़ी में मूसवा) पर डालने के मामले ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। इसी मुद्दे पर जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के सुप्रीमो अमित जोगी ने गुरुवार को अनोखे अंदाज़ में राज्य सरकार और बीजेपी पर करारा हमला बोला।

अमित जोगी खुद बाजार चारभाठा धान संग्रहण केंद्र पहुंचे और प्रतीकात्मक रूप से “सात करोड़ रुपये का धान खाने वाले मूसवा” की तलाश करते नजर आए। उन्होंने मौके पर मौजूद लोगों से सवाल किया—आखिर वह मूसवा कहां है जिसने इतना बड़ा घोटाला कर डाला? जोगी ने चूहे को ढूंढने वाले को 10 रुपये इनाम देने की घोषणा कर तंज भी कसा। इस पूरी कार्रवाई का वीडियो बनाकर उन्होंने साय सरकार पर तीखे प्रहार किए।

इसके बाद अमित जोगी कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंपते हुए सरकार पर आरोप लगाया कि कबीरधाम, महासमुंद सहित कई जिलों में धान गबन और कमीशन का खेल चल रहा है। उन्होंने पोस्टर दिखाकर कहा कि यह सिर्फ छोटे कर्मचारियों का मामला नहीं, बल्कि “मूसवा घोटाला एक महाघोटाला” है, जिसके पीछे सत्ता में बैठे बड़े लोग जिम्मेदार हैं। जोगी ने इस पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग करते हुए कहा कि सच्चाई सामने आने पर गबन के आंकड़े चौंकाने वाले होंगे।

दरअसल, प्रशासनिक दावों के मुताबिक 22 हजार क्विंटल से अधिक धान चूहों और दीमक द्वारा खा लिए जाने की बात कही गई, जिसकी कीमत करीब सात करोड़ रुपये आंकी गई है। यही दावा अब सरकार के लिए गले की फांस बन गया है। विपक्ष का कहना है कि यह भ्रष्टाचार को छिपाने का प्रयास है और जनता को गुमराह किया जा रहा है।

इससे पहले कवर्धा में किसान कांग्रेस ने विपणन विभाग के डीएमओ कार्यालय का घेराव किया था। कार्यकर्ता चूहे पकड़ने का पिंजड़ा लेकर पहुंचे और एसआईटी जांच, एफआईआर तथा गायब धान की वसूली की मांग की। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

कुल मिलाकर, कबीरधाम का धान घोटाला अब केवल प्रशासनिक मामला नहीं रहा, बल्कि राज्य की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है, जिस पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं।

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