भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम उपलब्धि हासिल हुई है। भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) के बेड़े में एडम्या श्रेणी का तीसरा फास्ट पेट्रोल वेसल ‘अमूल्य’ औपचारिक रूप से शामिल कर लिया गया है। इस आधुनिक और स्वदेशी जहाज के जुड़ने से भारत के पूर्वी तट की समुद्री निगरानी, सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।
शुक्रवार को आयोजित समारोह में ‘अमूल्य’ को तटरक्षक बल के हवाले किया गया। अधिकारियों के मुताबिक, यह जहाज निगरानी, खोज और बचाव (Search and Rescue), तस्करी रोकने, अवैध गतिविधियों पर नजर रखने और समुद्री प्रदूषण नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण अभियानों में तैनात रहेगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह जहाज समुद्र को सुरक्षित, स्वच्छ और संरक्षित रखने के तटरक्षक बल के संकल्प का प्रतीक है।
‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भरता की मिसाल
करीब 51 मीटर लंबा यह फास्ट पेट्रोल वेसल गोवा शिपयार्ड लिमिटेड में डिजाइन और निर्मित किया गया है। इसमें 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी उपकरणों का उपयोग किया गया है, जो रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता को दर्शाता है। यह जहाज ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियानों की सफलता का भी प्रमाण है।
अत्याधुनिक तकनीक, रफ्तार और मारक क्षमता
‘अमूल्य’ में दो शक्तिशाली 3000 किलोवाट डीजल इंजन लगाए गए हैं, जिनकी बदौलत यह जहाज 27 नॉट्स की अधिकतम गति से समुद्र में चल सकता है। इसकी 1500 समुद्री मील की परिचालन क्षमता इसे लंबे समय तक समुद्र में मिशन पर तैनात रहने योग्य बनाती है। सुरक्षा के लिहाज से इसमें 30 मिमी की एक तोप और 12.7 मिमी की दो रिमोट कंट्रोल गन लगाई गई हैं। इसके साथ ही आधुनिक लक्ष्य पहचान और फायर कंट्रोल सिस्टम भी मौजूद हैं।
इसके अलावा, जहाज में इंटीग्रेटेड ब्रिज सिस्टम, मशीनरी कंट्रोल सिस्टम और ऑटोमैटिक पावर मैनेजमेंट सिस्टम लगाए गए हैं, जो संचालन को सुरक्षित और अधिक प्रभावी बनाते हैं।
पारादीप में होगी तैनाती
आईसीजीएस ‘अमूल्य’ को ओडिशा के पारादीप में तैनात किया जाएगा। यह जहाज तटरक्षक बल के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के कमांडर के अधीन कार्य करेगा। जहाज की कमान कमांडेंट (जूनियर ग्रेड) अनुपम सिंह संभालेंगे और इसमें 5 अधिकारी व 34 जवान तैनात रहेंगे। अधिकारियों का मानना है कि ‘अमूल्य’ के शामिल होने से तटीय सुरक्षा, समुद्री निगरानी और आपदा राहत अभियानों में तटरक्षक बल की ताकत और बढ़ेगी, जिससे देश की समुद्री सीमाएं और अधिक सुरक्षित होंगी।