पश्चिम एशिया में जारी तनाव और समुद्री सुरक्षा चिंताओं के बीच भारत ने कूटनीतिक स्तर पर अहम पहल करते हुए अपने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की है। विदेश मंत्री S. Jaishankar ने स्पष्ट किया कि Iran के साथ पुराने सहयोग और सीधे संवाद के चलते भारतीय ध्वज वाले जहाजों को Strait of Hormuz से गुजरने की अनुमति मिल रही है।
उन्होंने यह भी साफ किया कि इसके लिए भारत और ईरान के बीच कोई नया समझौता नहीं हुआ है, बल्कि यह दोनों देशों के लंबे समय से चले आ रहे सहयोग का परिणाम है।
सीधे संवाद से मिला सकारात्मक परिणाम
एक इंटरव्यू में जयशंकर ने बताया कि ईरानी अधिकारियों के साथ भारत का सीधा संवाद जारी है और इसके अच्छे नतीजे सामने आए हैं। हर भारतीय ध्वज लगे जहाज को अलग-अलग अनुमति दी जा रही है ताकि वे सुरक्षित रूप से होर्मुज जलमार्ग पार कर सकें।
उन्होंने कहा कि अभी कई और भारतीय जहाजों को इस मार्ग से गुजरना है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं।
कोई लेन-देन नहीं, पुराने संबंधों का असर
विदेश मंत्री S. Jaishankar ने इस बात पर जोर दिया कि जहाजों की आवाजाही के बदले भारत ने ईरान को कोई विशेष लाभ नहीं दिया है।
उनके अनुसार यह कोई सौदेबाजी नहीं बल्कि भारत और ईरान के बीच वर्षों से चले आ रहे सहयोग और विश्वास का परिणाम है।
उच्चस्तरीय बातचीत के बाद मिली अनुमति
हाल ही में दो भारतीय ध्वज वाले एलपीजी जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति मिली थी। यह फैसला प्रधानमंत्री Narendra Modi और ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत के कुछ ही घंटों बाद सामने आया।
इसके अलावा जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष Seyed Abbas Araghchi के बीच भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई।
केवल अमेरिकी और इस्राइली जहाजों पर पाबंदी
तनावपूर्ण हालात के बीच ईरान ने होर्मुज जलमार्ग को मुख्य रूप से United States और Israel से जुड़े जहाजों के लिए बंद रखा है।
गौरतलब है कि यह जलडमरूमध्य दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। हालिया संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतें भी बढ़कर करीब 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं।
भारत ने अपनाया कूटनीतिक समाधान
जहां कुछ देशों से समुद्री सुरक्षा के लिए युद्धपोत भेजने की अपील की गई, वहीं भारत ने सैन्य विकल्प की बजाय कूटनीतिक संवाद का रास्ता चुना।
जयशंकर ने कहा कि भारत अपनी रणनीति यूरोपीय देशों के साथ साझा करने के लिए तैयार है, लेकिन हर देश के ईरान के साथ संबंध अलग-अलग हैं। ऐसे में भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए संवाद और भरोसे के जरिए समाधान निकाला है।