गुजरात में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अगुवाई वाली सरकार ने शुक्रवार को अपने मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबदल किया। इस कैबिनेट विस्तार के तहत 19 नए विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई, जिससे सरकार में अब कुल मंत्रियों की संख्या 17 से बढ़कर 26 हो गई है।
इस फेरबदल का सबसे बड़ा आकर्षण रहा हर्ष संघवी को उपमुख्यमंत्री बनाना और क्रिकेटर रवींद्र जडेजा की पत्नी रीवाबा जडेजा को मंत्री पद पर शामिल करना। रीवाबा की यह राजनीतिक पारी राज्य की राजनीति में नया अध्याय मानी जा रही है।
जातीय संतुलन पर फोकस
नई कैबिनेट में जातीय समीकरणों का विशेष ध्यान रखा गया है। आठ मंत्री पिछड़ा वर्ग, तीन अनुसूचित जाति, चार अनुसूचित जनजाति और आठ पटेल समाज से हैं। इस कदम से भाजपा ने 2027 के विधानसभा और आगामी स्थानीय चुनावों के लिए एक मजबूत सामाजिक संतुलन बनाने का संकेत दिया है।
चार साल बाद उपमुख्यमंत्री पद की वापसी
भूपेंद्र पटेल सरकार के कार्यकाल में यह पहला मौका है जब किसी उपमुख्यमंत्री की नियुक्ति हुई है। इससे पहले 2021 में नितिन पटेल के कार्यकाल के बाद यह पद समाप्त कर दिया गया था। हर्ष संघवी की पदोन्नति के साथ यह पद चार साल बाद पुनः स्थापित हुआ है।
महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ा
नई कैबिनेट में महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी है। इस फेरबदल के तहत तीन महिला मंत्रियों को जगह दी गई है, जिनमें रीवाबा जडेजा भी शामिल हैं। इससे भाजपा ने महिला सशक्तिकरण और संतुलित प्रतिनिधित्व की दिशा में सकारात्मक कदम बढ़ाया है।
वरिष्ठ मंत्रियों की विदाई
इस फेरबदल में मुख्यमंत्री ने दस मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया है, जिनमें बलवंतसिंह राजपूत, राघवजी पटेल, भानुबेन बाबरिया और मुलु बेरा जैसे वरिष्ठ नेता शामिल हैं। पार्टी ने इस कदम के जरिए संगठन में नई ऊर्जा और युवा नेतृत्व को बढ़ावा देने का संदेश दिया है।
राजनीतिक संकेत
यह फेरबदल आगामी चुनावों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। भाजपा ने न केवल जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की कोशिश की है, बल्कि इससे केंद्रीय नेतृत्व की पकड़ को भी और मजबूत किया गया है।