जेनिकुलर आर्टरी एम्बोलाइजेशन: दवा ले या सर्जरी करवाये

जेनिकुलर आर्टरी एम्बोलाइजेशन में घुटने की नसों तक पहुंचती पतली नली का चित्रण

जेनिकुलर आर्टरी एम्बोलाइजेशन यानी GAE इन दिनों घुटने के पुराने दर्द के इलाज में चर्चा में है. सितंबर 2026 में यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो ने इस पर अपने अनुभव साझा किए. दरअसल, गठिया के बहुत से मरीज़ ऐसे मोड़ पर होते हैं जहां दवा काम नहीं करती, पर सर्जरी का मन नहीं होता. यह लेख समझाता है कि GAE उसी खाली जगह को भरने की कोशिश क्यों करता है.

GAE आखिर किस समस्या का हल है

घुटने की गठिया (ऑस्टियोआर्थराइटिस) में जोड़ की गद्दी धीरे-धीरे घिसती है. साथ ही जोड़ के आसपास सूजन और नई छोटी नसें बनने लगती हैं. GAE इन्हीं नसों में बारीक कण डालकर खून का बहाव घटाता है. नतीजतन दर्द कम हो सकता है. हालांकि यह घिसी गद्दी को ठीक नहीं करता.

GAE को समझने के लिए 4 बातें

  • यह इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट करते हैं, यानी एक्स-रे की मदद से नली डालकर इलाज करने वाले विशेषज्ञ.
  • इसमें घुटना खोला नहीं जाता.
  • यह हल्के से मध्यम गठिया में सबसे बेहतर माना गया है.
  • इसके लंबे समय के असर पर शोध अभी चल रहा है.

दर्द और नसों का रिश्ता क्या है

अक्सर हम मानते हैं कि घुटने का दर्द सिर्फ हड्डियों के रगड़ने से होता है. लेकिन सूजन भी दर्द की बड़ी वजह है. सूजन वाले हिस्से में खून की सप्लाई बढ़ जाती है. वहीं इन नई नसों के साथ दर्द महसूस कराने वाली नसें भी बढ़ती मानी जाती हैं.

इसलिए डॉक्टरों ने सोचा कि अगर इस अतिरिक्त खून की सप्लाई को कम कर दिया जाए, तो सूजन और दर्द घट सकते हैं. जेनिकुलर आर्टरी एम्बोलाइजेशन इसी सोच पर टिका है. ‘जेनिकुलर’ शब्द घुटने के आसपास की धमनियों के लिए इस्तेमाल होता है.

इलाज की सीढ़ी में GAE कहां आता है

आमतौर पर घुटने की गठिया का इलाज कई चरणों में होता है.

  • पहला चरण: वज़न घटाना, व्यायाम, फिज़ियोथेरेपी और दर्द की दवा.
  • दूसरा चरण: डॉक्टर की सलाह पर जोड़ में इंजेक्शन.
  • तीसरा चरण: जब ऊपर के तरीके काम न करें, तब GAE जैसे विकल्प पर विचार.
  • आखिरी चरण: गंभीर घिसावट में घुटना बदलने की सर्जरी.

यानी GAE सर्जरी की जगह लेने का दावा नहीं करता. बल्कि यह उन लोगों के लिए है जो बीच में अटके हैं.

अब तक के नतीजे क्या कहते हैं

यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो एंशुट्ज़ स्कूल ऑफ मेडिसिन की रेडियोलॉजिस्ट डॉ. लेह कासाडाबन इस पर ट्रायल कर रही हैं. उनके मुताबिक करीब 70% मरीज़ों में दर्द का स्कोर आधा या उससे भी कम हुआ. इसके अलावा उन्होंने बताया कि जापान के आंकड़ों में राहत चार साल तक और अमेरिकी आंकड़ों में दो साल तक दिखी.

दूसरी तरफ, एक संस्थान का अनुभव पूरी तस्वीर नहीं होता. ब्रिटेन की स्वास्थ्य संस्था NICE ने 2021 की गाइडेंस में कहा था कि कम समय में सुरक्षा पर कोई बड़ी चिंता नहीं दिखी. फिर भी उसने मरीज़ों के चुनाव, तकनीक और लंबे असर पर रैंडमाइज़्ड ट्रायल की सिफारिश की.

जेनिकुलर आर्टरी एम्बोलाइजेशन के संभावित साइड इफेक्ट

उपलब्ध मेडिकल जानकारी के मुताबिक कुछ मरीज़ों में घुटने की त्वचा का रंग कुछ समय के लिए बदल सकता है. कुछ को नील, सुन्नपन या झनझनाहट महसूस होती है. वहीं कण के गलत जगह पहुंचने जैसी दिक्कत दुर्लभ बताई गई है.

इसी वजह से NICE का ज़ोर इस बात पर है कि यह काम सिर्फ प्रशिक्षित इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट करें. मरीज़ के लिए इसका मतलब साफ है. अस्पताल और डॉक्टर का अनुभव ज़रूर पूछें.

किन्हें ज़्यादा सोच-समझकर फैसला लेना चाहिए

  • जिनकी घुटने की घिसावट बहुत आगे बढ़ चुकी है, उनमें राहत कम समय तक रहती है.
  • जिन्हें कंट्रास्ट डाई से एलर्जी का इतिहास है, वे डॉक्टर को पहले बताएं.
  • किडनी की समस्या या खून पतला करने की दवा लेने वाले मरीज़ पूरी जानकारी साझा करें.

छत्तीसगढ़ और छोटे शहरों के मरीज़ क्या करें

फिलहाल यह प्रक्रिया ज़्यादातर बड़े शहरों के बड़े अस्पतालों में इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी विभाग तक सीमित है. इसलिए पहले अपने ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से एक्स-रे के आधार पर गठिया की गंभीरता समझें. फिर तय करें कि जेनिकुलर आर्टरी एम्बोलाइजेशन के बारे में किसी विशेषज्ञ से दूसरी राय लेनी है या नहीं. साथ ही खर्च और बीमा कवर की जानकारी पहले ही ले लें.

जेनिकुलर आर्टरी एम्बोलाइजेशन पर पाठकों के सवाल

क्या GAE के बाद फिज़ियोथेरेपी की ज़रूरत रहती है?

हां, अक्सर डॉक्टर मांसपेशियों को मज़बूत रखने की सलाह देते हैं. दरअसल, दर्द घटने के बाद कसरत करना आसान हो जाता है.

क्या यह स्टेम सेल या PRP इंजेक्शन जैसा है?

नहीं. वे इंजेक्शन सीधे जोड़ में दिए जाते हैं. जबकि GAE में नसों के ज़रिए खून का बहाव कम किया जाता है.

प्रक्रिया में कितना समय लगता है?

आमतौर पर एक से दो घंटे लगते हैं. इस दौरान मरीज़ को हल्की नींद की दवा दी जाती है, पूरी बेहोशी नहीं. फिर कुछ घंटे निगरानी के बाद ज़्यादातर मरीज़ उसी दिन घर लौट जाते हैं. हालांकि डॉक्टर कुछ दिन आराम की सलाह देते हैं.

डिस्क्लेमर: यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी के लिए है. इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें. किसी बीमारी, दवा, डाइट या व्यायाम में बदलाव से पहले योग्य डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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