भारतीय तीरंदाजी को पांच साल बाद विश्वकप स्तर पर बड़ी सफलता मिली है। युवा तीरंदाज धीरज बोम्मादेवरा ने तुर्किये के अंताल्या में आयोजित विश्व तीरंदाजी विश्वकप स्टेज-3 में दो स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। उनकी इस उपलब्धि के पीछे वर्षों का संघर्ष, माता-पिता का त्याग और अटूट विश्वास छिपा हुआ है।
विश्वकप में चमका भारतीय तीरंदाजी का सितारा
24 वर्षीय धीरज बोम्मादेवरा ने पहले रिकर्व मिश्रित टीम स्पर्धा में कुमकुम मोहोड के साथ स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद पुरुष व्यक्तिगत रिकर्व वर्ग के फाइनल में दक्षिण कोरिया के मजबूत खिलाड़ी ली वू सियोक को हराकर दूसरा स्वर्ण अपने नाम किया।
यह उपलब्धि भारतीय तीरंदाजी के लिए बेहद खास मानी जा रही है, क्योंकि लंबे समय बाद किसी भारतीय खिलाड़ी ने विश्वकप में इतना प्रभावशाली प्रदर्शन किया है।
पिता ने बेटे के सपने को बनाया अपना मिशन
धीरज के पिता श्रवण कुमार शुरू से खेल प्रेमी रहे हैं। जब उन्होंने अपने बेटे की रुचि तीरंदाजी में देखी तो खुद इस खेल को समझने का फैसला किया। उन्होंने तीरंदाजी संघ की जज परीक्षा पास की और राज्य के वरिष्ठ जजों में शामिल हो गए।
उनका मानना था कि यदि वे खेल को गहराई से समझेंगे तो बेटे का बेहतर मार्गदर्शन कर पाएंगे। यही समर्पण आज धीरज बोम्मादेवरा की सफलता की मजबूत नींव बना।
जब मां ने गिरवी रखा अपना मंगलसूत्र
साल 2017 में धीरज के करियर पर संकट के बादल मंडरा रहे थे। बेहतर प्रदर्शन के लिए विदेशी उपकरणों की आवश्यकता थी, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। ऐसे में उनकी मां रेवती ने अपना मंगलसूत्र गिरवी रखकर धन जुटाया ताकि बेटे के लिए नया धनुष खरीदा जा सके।
यह फैसला धीरज के करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। बाद में उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर परिवार के त्याग को सार्थक किया।
पेरिस ओलंपिक की निराशा से निकली नई ऊर्जा
पेरिस ओलंपिक में पदक से चूकना धीरज बोम्मादेवरा के लिए बड़ा झटका था। हालांकि उन्होंने हार को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। अंताल्या विश्वकप में उन्होंने शानदार वापसी करते हुए उन खिलाड़ियों को मात दी, जिनके खिलाफ भारतीय तीरंदाज अक्सर दबाव महसूस करते हैं।
उनकी यह जीत मानसिक मजबूती और निरंतर मेहनत का परिणाम मानी जा रही है।
मुख्यमंत्री और राज्यपाल ने दी बधाई
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और राज्यपाल एस. अब्दुल नजीर ने धीरज बोम्मादेवरा को ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए बधाई दी। दोनों नेताओं ने कहा कि उनकी सफलता देश के युवाओं के लिए प्रेरणा है।
आगे और बड़े लक्ष्य पर नजर
दो स्वर्ण पदक जीतने के बावजूद धीरज इसे अपने करियर का अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत मानते हैं। उनका लक्ष्य आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों और ओलंपिक में भारत के लिए और अधिक पदक जीतना है।
निष्कर्ष
धीरज बोम्मादेवरा की कहानी केवल खेल उपलब्धि नहीं, बल्कि परिवार के त्याग, संघर्ष और विश्वास की मिसाल है। मां के मंगलसूत्र से शुरू हुई यह यात्रा आज विश्वकप के दो स्वर्ण पदकों तक पहुंच चुकी है। उनकी सफलता आने वाली पीढ़ियों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा देती रहेगी।
यह भी पढ़ें – Pritam and Pedro Trailer में दिखा कॉमेडी और साइबर क्राइम
दोहा डायमंड लीग में नीरज चोपड़ा की बहुप्रतीक्षित वापसी
विक्की कौशल ने गुरदास मान संग साझा की खास मुलाकात