छत्तीसगढ़ की रसोई चावल के बिना अधूरी है. यहां चावल से बनने वाले कई व्यंजन हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ी फरा का अपना खास स्थान है. यह भाप या पानी में पकने वाला नाश्ता है. इसे बनाने में न ज़्यादा तेल लगता है, न ज़्यादा मेहनत. रात का बचा चावल भी इसमें काम आ जाता है. अगर आप इसे पहली बार बना रहे हैं, तो यह आसान गाइड आपकी मदद करेगी.
फरा बनाने का सार
छत्तीसगढ़ी फरा बनाने के लिए पके चावल को पीसकर चावल के आटे में मिलाएं और गर्म पानी से नरम आटा गूंथें. इसकी पतली, लंबी बत्तियां बनाकर उबलते पानी या स्टीमर में पकाएं. फिर राई, जीरा, तिल, करी पत्ते और हरी मिर्च का तड़का लगाएं. लगभग आधे घंटे में नाश्ता तैयार है.
क्यों बनाएं यह नाश्ता
1. इसमें तेल सिर्फ तड़के में लगता है.
2. रात के बचे चावल बर्बाद नहीं होते.
3. सामग्री हर घर में आसानी से मिल जाती है.
4. बच्चे और बड़े, सब इसे पसंद करते हैं.
5. टिफिन के लिए भी अच्छा विकल्प है.
ज़रूरी सामग्री
आटे के लिए: एक कप चावल का आटा, आधा कप पका चावल, नमक, थोड़ा जीरा और गुनगुना पानी.
तड़के के लिए: एक-दो चम्मच तेल, राई, जीरा, सफेद तिल, करी पत्ता, हरी मिर्च, लहसुन और चाहें तो थोड़ी हींग.
सजाने के लिए: बारीक कटा हरा धनिया और नींबू.
छत्तीसगढ़ी फरा बनाने का तरीका
पहला चरण: आटा गूंथना
पके चावल को थोड़े पानी के साथ मिक्सर में महीन पीस लें. इसे चावल के आटे में मिलाएं. नमक और जीरा डालें. अब थोड़ा-थोड़ा गुनगुना पानी डालकर गूंथें. आटा चिकना और नरम होना चाहिए. अगर आटा हाथ में चिपके तो थोड़ा सूखा आटा मिला दें.
दूसरा चरण: बत्तियां बनाना
हाथों पर हल्का तेल लगाएं. छोटी-छोटी लोइयां लें. हथेलियों के बीच घुमाकर लंबी, पतली बत्ती का आकार दें. कई घरों में फरे को हल्का चपटा या छोटे गोले जैसा भी बनाया जाता है. आकार अपनी पसंद से रखें, बस मोटाई कम रहे.
तीसरा चरण: पकाना
उबालने का तरीका: बड़े बर्तन में पानी उबालें. उसमें थोड़ा तेल और नमक डालें. फरे डालकर मध्यम आंच पर पकाएं. कुछ मिनट में ये पानी की सतह पर तैरने लगेंगे. यही पकने का संकेत है.
भाप का तरीका: स्टीमर या इडली स्टैंड में फरे रखें. ढककर 12 से 15 मिनट पकाएं. पकने के बाद इनका रंग हल्का पारदर्शी हो जाता है.
चौथा चरण: तड़का
कढ़ाई में तेल गर्म करें. राई चटकाएं. जीरा, तिल, करी पत्ता, हरी मिर्च और लहसुन डालें. खुशबू आने पर फरे डालें. हल्के हाथ से चलाएं ताकि फरे टूटें नहीं. ऊपर से धनिया और नींबू का रस डालें.
छत्तीसगढ़ी फरा के अलग-अलग रूप
गुड़ वाला मीठा फरा
आटे को गुड़ घुले पानी से गूंथें. थोड़ी इलायची डालें. बाकी विधि वही है. तड़का न लगाएं. बच्चों के लिए यह अच्छा नाश्ता है.
सब्ज़ी वाला फरा
तड़के में बारीक कटा प्याज, टमाटर और शिमला मिर्च डाल सकते हैं. इससे फरा ज़्यादा पौष्टिक और रंगीन बनता है.
तला हुआ फरा
कुछ लोग उबले फरे को हल्का तलकर खाते हैं. स्वाद अच्छा होता है, पर तेल बढ़ जाता है. रोज़ के लिए उबला या भाप वाला फरा बेहतर है.
गलतियां जो फरा बिगाड़ सकती हैं
- ठंडे पानी से आटा गूंथना: इससे आटा फटता है.
- बहुत मोटी बत्तियां: अंदर से कच्ची रह जाती हैं.
- बर्तन में भीड़: फरे आपस में चिपक जाते हैं.
- तड़के में तेज़ चलाना: फरे टूट जाते हैं.
- पुराना या नमी वाला चावल का आटा: स्वाद और बनावट दोनों खराब होते हैं.
चावल की धरती की पहचान
छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है. यहां की रसोई में चावल सिर्फ भात के रूप में नहीं, कई रूपों में आता है. चीला, अंगाकर रोटी, मुठिया और फरा इसके उदाहरण हैं. ये व्यंजन सादगी और समझदारी, दोनों का मेल हैं. बचा खाना फेंकने की जगह उससे नया व्यंजन बनाना हमारी पारंपरिक रसोई की सीख है.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या बिना पके चावल के फरा बन सकता है?
हां. सिर्फ चावल के आटे से भी फरा बनता है. बस आटा उबलते पानी से गूंथें. पका चावल मिलाने से फरे ज़्यादा नरम बनते हैं.
फरे पानी में टूट क्यों जाते हैं?
अक्सर आटा ठीक से न गूंथने या पानी ठंडा होने से ऐसा होता है. आटे को अच्छी तरह मसलें और पानी पूरी तरह उबलने के बाद ही फरे डालें.
क्या इसे पहले से बनाकर रख सकते हैं?
उबले हुए फरे फ्रिज में एक दिन तक रखे जा सकते हैं. परोसने से पहले ताज़ा तड़का लगाएं. इससे स्वाद ताज़ा लगता है.
डायबिटीज़ के मरीज़ खा सकते हैं?
फरा चावल से बनता है, इसलिए इसमें कार्बोहाइड्रेट ज़्यादा होता है. डायबिटीज़ वाले लोग मात्रा के बारे में डॉक्टर से पूछें. साथ में सब्ज़ियां मिलाकर खाना बेहतर रहेगा.
परोसने का तरीका
गरम फरे को टमाटर या धनिया-पुदीने की चटनी के साथ परोसें. साथ में अदरक वाली चाय हो तो क्या कहने. बरसात या सर्दी की सुबह यह नाश्ता खास तौर पर अच्छा लगता है. बचे फरे अगले दिन हल्का गर्म करके भी खाए जा सकते हैं.
अस्वीकरण: यह पारंपरिक घरेलू रेसिपी सामान्य जानकारी के लिए है. यह किसी तरह की पोषण या चिकित्सा सलाह नहीं है. डायबिटीज़ या खास डाइट वाले लोग अपने डॉक्टर या पोषण विशेषज्ञ से मात्रा के बारे में सलाह लें
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