भारत नहीं रोकेगा रूसी तेल खरीद, ट्रंप के दबाव पर सरकार ने तोड़ी चुप्पी

भारत ने एक बार फिर वैश्विक दबाव के बावजूद अपने ऊर्जा हितों की रक्षा का साहसिक निर्णय लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तीखी टिप्पणी और टैरिफ की चेतावनियों के बीच सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद नहीं करेगा। भारतीय तेल कंपनियों ने भी कहा है कि उन्हें रूस से तेल आयात रोकने को लेकर किसी भी तरह का निर्देश नहीं मिला है।

रूस दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उत्पादक है और वैश्विक आपूर्ति का 10% हिस्सा उसकी हिस्सेदारी में आता है। भारत ने मार्च 2022 से ही सस्ते रूसी तेल को आयात करना शुरू कर दिया था, जब ब्रेंट क्रूड की कीमतें 137 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई थीं। उस समय, यह कदम भारत के लिए जरूरी था, जिससे घरेलू महंगाई को नियंत्रित किया जा सके और वैश्विक ऊर्जा संकट से निपटा जा सके।

हालांकि अमेरिका और यूरोपीय संघ ने रूस पर प्रत्यक्ष प्रतिबंध नहीं लगाया है, लेकिन G7 देशों ने मूल्य सीमा नीति के तहत रूसी तेल को 60 डॉलर प्रति बैरल तक सीमित कर दिया था। भारत की सार्वजनिक तेल कंपनियां इसी सीमा के भीतर रहकर तेल खरीदती रही हैं। अब यूरोपीय संघ इसे घटाकर 47.6 डॉलर करने की तैयारी में है।

ट्रंप ने भारत को दोस्त कहा लेकिन साथ ही टैरिफ बढ़ाने और सैन्य उपकरण खरीद पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत को 1 अगस्त से 25% टैरिफ देना होगा। इसके बावजूद भारत का रुख साफ है – ऊर्जा जरूरतों में राजनीति नहीं होनी चाहिए।

भारत ने न केवल अपने हित सुरक्षित किए बल्कि वैश्विक बाजार को स्थिर बनाए रखने में भी भूमिका निभाई। यह निर्णय दिखाता है कि भारत अब अपनी नीति में आत्मनिर्भर और निर्णायक है।

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