भारत ने एक बड़ा आर्थिक कदम उठाते हुए ब्रिक्स देशों को आपसी व्यापार 100% रुपये में करने की अनुमति दे दी है। इस फैसले को अमेरिकी डॉलर के दबदबे को सीधी चुनौती माना जा रहा है। रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने भी बैंकों को निर्देश दिया है कि वे अब बिना पूर्व अनुमति के अधिक वोस्ट्रो खाते खोल सकेंगे, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में रुपये का इस्तेमाल बढ़ेगा।
ब्रिक्स देशों की ताकत
ब्रिक्स (BRICS) देशों की संयुक्त आबादी लगभग 300 करोड़ से ज्यादा है और इनकी कुल अर्थव्यवस्था करीब 24 ट्रिलियन डॉलर की है। ऐसे में जब इन देशों के बीच डॉलर की जगह रुपये का लेन-देन शुरू होगा, तो यह वैश्विक वित्तीय संतुलन में बड़ा बदलाव ला सकता है।
रुपये की बढ़ती अहमियत
एक रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई की नई गाइडलाइंस के बाद भारतीय बैंक अब विदेशी आयात-निर्यात कारोबार को विशेष वोस्ट्रो खातों के माध्यम से रुपये में निपटान की सुविधा देंगे। विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से डॉलर पर निर्भरता घटेगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में रुपये की ताकत बढ़ेगी।
अमेरिका से टकराव का असर
यह ऐतिहासिक निर्णय ऐसे समय आया है जब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ लगाने का ऐलान किया। मोदी सरकार के इस कदम को वॉशिंगटन की नीतियों के खिलाफ एक जवाबी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। अब भारत ने ब्रिक्स के अलावा अन्य देशों को भी रुपये में लेन-देन करने की अनुमति दे दी है, जिससे सीमा पार व्यापार और आसान होगा।
वोस्ट्रो खाते की बाधा खत्म
पहले विदेशी बैंकों को वोस्ट्रो खाता खोलने के लिए आरबीआई से अनुमति लेनी पड़ती थी। अब यह प्रक्रिया सरल कर दी गई है। इसका मतलब है कि अधिक विदेशी कंपनियां भारतीय रुपये में व्यापार कर पाएंगी। इससे भारत को जहां फायदा होगा, वहीं अमेरिकी डॉलर को नुकसान झेलना पड़ेगा।
क्या है वोस्ट्रो खाता?
वोस्ट्रो खाता वह खाता है जो किसी घरेलू बैंक में विदेशी बैंक की ओर से खोला जाता है। इसमें घरेलू मुद्रा (यानी रुपये) में लेन-देन होता है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी अमेरिकी बैंक का भारतीय बैंक में वोस्ट्रो खाता है, तो भारतीय बैंक अमेरिकी बैंक के लिए रुपये रखता है और उनके लेन-देन को पूरा करता है। यह व्यवस्था डॉलर की जगह सीधे रुपये में कारोबार करने की सुविधा देती है।