पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए इसे “लोकतंत्र की हत्या” करार दिया है। हार के बाद उन्होंने खुलकर चुनाव आयोग और भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि यह उनके राजनीतिक जीवन का सबसे “गंदा और अत्याचारी” चुनाव रहा।
हार की समीक्षा के लिए बनी विशेष टीम
चुनावी पराजय के बाद ममता बनर्जी ने पार्टी की हार के कारणों की समीक्षा के लिए 10 सदस्यीय विशेष टीम गठित करने का एलान किया है। उन्होंने कहा कि इस टीम का उद्देश्य पूरे चुनावी घटनाक्रम की जांच करना और भविष्य की रणनीति तैयार करना होगा।
‘90 लाख वोट काटे गए’, EVM पर भी उठाए सवाल
ममता बनर्जी ने सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि चुनाव से पहले वोटर लिस्ट से करीब 90 लाख नाम हटाए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद केवल 32 लाख नाम ही वापस जोड़े गए।
EVM को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए और कहा कि वोटिंग के बाद मशीनों में 80-90% बैटरी चार्ज रहना तकनीकी रूप से संभव नहीं है।
भाजपा और चुनाव आयोग पर ‘मैच फिक्सिंग’ का आरोप
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा और चुनाव आयोग के बीच “मैच फिक्सिंग” हुई है। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष अधिकारियों को हटाकर पक्षपाती अधिकारियों की नियुक्ति की गई और उनके कार्यकर्ताओं को चुनाव से पहले डराया-धमकाया गया।
विपक्षी एकजुटता का संदेश
हार के बावजूद ममता बनर्जी ने विपक्षी एकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल और उद्धव ठाकरे सहित कई नेताओं ने उन्हें फोन कर समर्थन जताया।
साथ ही उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव जल्द कोलकाता आकर उनसे मुलाकात करेंगे, जिससे आगे की रणनीति तय की जाएगी।
इस्तीफे की पेशकश, लेकिन लड़ाई जारी
ममता बनर्जी ने हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की पेशकश भी की है। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई भाजपा से ज्यादा चुनाव आयोग की निष्पक्षता के खिलाफ थी और लोकतंत्र की रक्षा के लिए वे हर संभव कदम उठाएंगी।
बंगाल चुनाव के नतीजों के बाद ममता बनर्जी के ये बयान राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर रहे हैं और आने वाले दिनों में सियासी समीकरणों पर बड़ा असर डाल सकते हैं।
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