जगदलपुर, 19 फरवरी 2025: बस्तर राजपरिवार के सदस्य कमलचंद्र भंजदेव के विवाह समारोह में ऐतिहासिक परंपरा पुनर्जीवित हो रही है। माता दंतेश्वरी की डोली इस शुभ अवसर पर विशेष पूजन के बाद जगदलपुर रवाना हो गई है। शाही विवाह में मां दंतेश्वरी को आमंत्रित करने की यह परंपरा 100 साल पुरानी परंपरा से अधिक पुरानी है, जिसे एक बार फिर से निभाया जा रहा है।
शाही विवाह के लिए मां दंतेश्वरी का न्यौता
राजपरिवार की परंपरा के अनुसार, किसी भी मांगलिक कार्य में सर्वप्रथम माता दंतेश्वरी को न्यौता दिया जाता है। क्योंकि वे बस्तर राजपरिवार की कुलदेवी हैं, इसलिए दंतेवाड़ा जाकर उन्हें विवाह में शामिल होने का आमंत्रण दिया गया। माता के छत्र और छड़ी को विशेष अनुष्ठान के बाद जगदलपुर भेजा गया, जहां विवाह स्थल पर इनकी स्थापना होगी।
100 साल पुरानी परंपरा फिर जीवंत
मंदिर के पुजारी हरेंद्र नाथ जिया ने बताया कि यह परंपरा महाराजा रुद्रप्रताप देव के विवाह के दौरान प्रारंभ हुई थी। राजपरिवार के अनुरोध पर प्रधान पुजारियों ने इस परंपरा को दोबारा शुरू करने की स्वीकृति दी है।
पुलिस की सलामी के बाद रवाना हुई डोली
मां दंतेश्वरी के छत्र और छड़ी को पुलिस जवानों ने सलामी देकर विदा किया। इसके बाद इन्हें मंदिर के पुजारी, सेवादार और 12 लंकवारों के साथ जय स्तंभ तक लाया गया। वहां से सुसज्जित वाहन में रखकर यह प्रतीक चिन्ह शाही विवाह स्थल के लिए रवाना हुए।
देशभर के 100 से अधिक राजपरिवारों का आगमन
शाही विवाह समारोह में देशभर के 100 से अधिक राजपरिवारों को आमंत्रित किया गया है। अब तक 50 से अधिक राजपरिवारों के सदस्य जगदलपुर पहुंच चुके हैं, जबकि कुछ चार्टर्ड प्लेन से आ रहे हैं। विवाह के लिए राजमहल परिसर को विशेष रूप से सजाया गया है, जिससे इस ऐतिहासिक अवसर को भव्य रूप दिया जा सके।