घर में बढ़ती उम्र के साथ जब बुजुर्ग सदस्य को नींद कम आने लगे और छोटी-छोटी बातें भूलने लगे, तो परिवार वाले अक्सर परेशान हो जाते हैं. एक हालिया वैज्ञानिक अध्ययन ने इस समस्या से निपटने की एक नई दिशा दिखाई है. सीनियर सिटीज़न कॉग्निटिव हेल्थ रिसर्च के इन नतीजों ने विटामिन डी और दिमागी सेहत के बीच एक दिलचस्प संबंध उजागर किया है.
किस तरह हुआ यह अध्ययन
अमेरिका के एक प्रतिष्ठित शोध संस्थान के वैज्ञानिकों ने यह अध्ययन किया है, जिसे एक चिकित्सा जर्नल में प्रकाशित किया गया है. शोध में 54 ऐसे बुजुर्गों को शामिल किया गया, जिन्हें नींद से जुड़ी परेशानी के साथ-साथ हल्की दिमागी कमजोरी भी थी. डिमेंशिया के शुरुआती चरण में अक्सर यही दोनों लक्षण एक साथ नजर आते हैं. शामिल किए गए लोगों की औसत उम्र करीब 67 साल थी.
विटामिन डी लेने वालों को मिला बड़ा फायदा
अध्ययन में सामने आया कि जो बुजुर्ग रोजाना 5,000 IU या इससे अधिक विटामिन डी ले रहे थे, उन्होंने एक मानक दिमागी परीक्षण में उन लोगों से 13 प्रतिशत ज्यादा अंक हासिल किए, जो कोई विटामिन डी नहीं ले रहे थे. यह परीक्षण याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता जांचने के लिए इस्तेमाल होता है. वहीं कम मात्रा में विटामिन डी लेने वाले प्रतिभागियों में ऐसा कोई खास सुधार नहीं देखा गया.
इस खोज का महत्व क्यों बढ़ जाता है
इससे पहले किसी अध्ययन ने नींद की समस्या और हल्की दिमागी कमजोरी, दोनों झेल रहे बुजुर्गों में विटामिन डी और समग्र दिमागी सेहत के रिश्ते को इस तरह परखा नहीं था. शोधकर्ताओं के अनुसार यह शुरुआती लेकिन उम्मीद जगाने वाले नतीजे हैं. उनका मानना है कि विटामिन डी जैसे आसान और सस्ते उपाय को डिमेंशिया की रोकथाम की रणनीति में शामिल करने पर आगे शोध होना चाहिए.
सावधानी बरतना क्यों जरूरी है
इस स्टडी का दायरा सिर्फ 54 लोगों तक सीमित था, इसलिए इसे अंतिम निष्कर्ष मानकर खुद से विटामिन डी की मात्रा बढ़ा लेना सही नहीं होगा. जरूरत से ज्यादा विटामिन डी लेने पर किडनी और हड्डियों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं. हर व्यक्ति के शरीर में विटामिन डी का स्तर अलग होता है, इसलिए सही खुराक जानने के लिए पहले ब्लड टेस्ट करवाना जरूरी है.
परिवार के बुजुर्गों का कैसे रखें ख्याल
घर के बुजुर्ग सदस्यों की नींद और याददाश्त पर नियमित नजर रखना जरूरी है. रोजाना कुछ समय हल्की धूप में बिताना, संतुलित भोजन करना और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच करवाना दिमागी सेहत को बनाए रखने में सहायक हो सकता है. अगर नींद की दिक्कत या भूलने की समस्या लगातार बढ़ रही हो, तो इसे उम्र का सामान्य असर मानकर टालने के बजाय डॉक्टर से जांच करवाना बेहतर रहता है.
अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और चिकित्सीय सलाह नहीं है. कोई भी सप्लीमेंट शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें.
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