कोरिया जिले के बैकुंठपुर में इस वर्ष होली का स्वरूप बदलता नजर आ रहा है। रासायनिक रंगों की बजाय स्थानीय स्तर पर तैयार हर्बल रंगों को प्राथमिकता दी जा रही है। महिला स्वसहायता समूहों ने हरी भाजी और लाल भाजी के रस से प्राकृतिक गुलाल तैयार कर बाजार में उपलब्ध कराया है, जिसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
होली की पूर्व संध्या पर मुख्य बाजारों में रंग, अबीर, गुलाल और पिचकारियों की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ देखी गई। दुकानदारों के अनुसार, अभिभावक विशेष रूप से बच्चों के लिए सुरक्षित रंगों की खरीदारी कर रहे हैं। हर्बल रंग त्वचा और आंखों के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जा रहे हैं।
स्थानीय महिलाओं द्वारा तैयार किए गए इन रंगों को पर्यावरण अनुकूल विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। बाजार में लाल, गुलाबी, पीले और हरे रंगों की उपलब्धता के साथ उत्सव का माहौल बना हुआ है। इस वर्ष 2 मार्च को होलिका दहन संपन्न हुआ, जबकि 4 मार्च को रंगों का पर्व मनाया जाएगा।