अरावली पर्वत श्रृंखला को लेकर एक बार फिर सियासी और पर्यावरणीय बहस तेज हो गई है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पहाड़ियों की प्रस्तावित नई परिभाषा लागू होने से अरावली क्षेत्र का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा पर्यावरणीय संरक्षण के दायरे से बाहर चला जाएगा। इससे खनन और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए रास्ता खुल सकता है, जो पारिस्थितिकी के लिए घातक साबित होगा।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बयान जारी कर कहा कि सरकार की नीतियां पर्यावरण संरक्षण को कमजोर करने की दिशा में बढ़ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लगातार पर्यावरणीय कानूनों में ढील दे रही है और प्रदूषण से जुड़े मानकों को कमजोर किया जा रहा है।
जयराम रमेश ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वैश्विक मंचों पर पर्यावरण संरक्षण की बड़ी बातें करते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इसके विपरीत फैसले लिए जा रहे हैं। उनका दावा है कि यह नीतिगत बदलाव एक सुनियोजित रणनीति के तहत किए जा रहे हैं, जिससे प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन आसान हो सके।
कांग्रेस का कहना है कि अरावली पर्वतमाला न केवल पर्यावरण संतुलन के लिए अहम है, बल्कि उत्तर भारत के कई हिस्सों के लिए जल सुरक्षा और जैव विविधता की रीढ़ भी है। ऐसे में इसके संरक्षण से जुड़े नियमों को कमजोर करना आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा।