करीब दो दशक पुराने बहुचर्चित जग्गी हत्याकांड मामले में छत्तीसगढ़ के प्रमुख राजनीतिक चेहरे Amit Jogi को बड़ी राहत मिली है। Supreme Court of India ने उनकी दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब हाल ही में हाईकोर्ट ने उन्हें इस मामले में दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी।
दरअसल, Amit Jogi ने Chhattisgarh High Court के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने 6 अप्रैल को उन्हें दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी और तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था। इसी के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल सजा पर रोक लगाने का निर्णय लिया।
यह मामला Ram Avtar Jaggi की हत्या से जुड़ा है, जो वर्षों से राजनीतिक और कानूनी बहस का केंद्र बना हुआ है। इस हत्याकांड में शुरुआती आरोप तत्कालीन मुख्यमंत्री Ajit Jogi और उनके बेटे अमित जोगी पर लगाए गए थे। मामले की जांच 2004 में Central Bureau of Investigation को सौंपी गई थी।
सीबीआई ने अपनी जांच में अमित जोगी को इस साजिश का मुख्य सूत्रधार बताते हुए चार्जशीट दाखिल की थी। हालांकि, 2007 में विशेष सीबीआई अदालत ने सबूतों के अभाव में उन्हें बरी कर दिया था, जबकि अन्य 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
बाद में पीड़ित पक्ष की ओर से इस फैसले को चुनौती दी गई, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पुनर्विचार के लिए हाईकोर्ट भेजा था। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए अमित जोगी को दोषी माना और सजा सुनाई।
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में जोगी ने तर्क दिया कि हाईकोर्ट ने पर्याप्त सुनवाई के बिना जल्दबाजी में फैसला सुनाया। उन्होंने दावा किया कि केवल 40 मिनट की सुनवाई के आधार पर सजा देना न्यायसंगत नहीं है। इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए शीर्ष अदालत ने फिलहाल सजा पर रोक लगाई है।
यह फैसला न केवल इस लंबे समय से चल रहे मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ है, बल्कि प्रदेश की राजनीति पर भी इसका असर पड़ सकता है। आगे की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्णय इस मामले की दिशा तय करेगा।