रायपुर जेल में जीवन ठाकुर की मौत — आदिवासी समाज का तीखा विरोध

केंद्रीय जेल रायपुर में जीवन ठाकुर की संदिग्ध मौत के बाद प्रदेशभर में जनाक्रोश बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को चारामा में आदिवासी समाज के लोगों ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए नेशनल हाईवे 30 पर थाना के सामने चक्का जाम कर दिया। इस अचानक हुए आंदोलन से हाईवे के दोनों ओर वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं और आवागमन पूरी तरह ठप हो गया।

आदिवासी समाज के लोगों का आरोप है कि जीवन ठाकुर की मौत सामान्य नहीं, बल्कि गंभीर संदेहों से भरी है। परिजन और समाज के प्रतिनिधि निष्पक्ष व उच्च स्तरीय जांच, दोषियों पर कठोर कार्रवाई और पूरी घटना की पारदर्शिता की मांग पर अड़े हुए हैं। इसी विरोध के चलते परिजनों ने शव लेने से भी इंकार कर दिया है।

स्थिति के बिगड़ते स्वरूप को देखते हुए मौके पर पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई है। वहीं आंदोलन की तीव्रता को देखते हुए प्रशासन से बातचीत के प्रयास जारी हैं परन्तु समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि ठोस कार्रवाई के बिना विरोध खत्म नहीं किया जाएगा।

इस घटना ने न केवल आदिवासी समाज को व्यथित किया है, बल्कि सर्व पिछड़ा वर्ग समाज ने भी मृत्यु को संदिग्ध बताया है। प्रदेश अध्यक्ष जगन्नाथ साहू, संभागीय उपाध्यक्ष अरविंद जैन, जिला अध्यक्ष मटेश्वर जैन और संरक्षक हरेश चक्रधारी ने बयान जारी कर कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो पिछड़ा वर्ग समाज भी बड़े पैमाने पर आंदोलन करने बाध्य होगा।

रायपुर जेल में जीवन ठाकुर की मौत ने जनजातीय और पिछड़े वर्ग समुदायों में भारी असंतोष खड़ा कर दिया है और यह मामला अब प्रदेश की बड़ी कानून व्यवस्था और सामाजिक संवेदनशीलता का मुद्दा बन चुका है। अब सभी की निगाहें सरकार और प्रशासन के आगामी निर्णय पर टिकी हैं।

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