छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ कही जाने वाली मितानिन महिलाएं अब आंदोलन के रास्ते पर हैं। मितानिन संघ ने 7 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल और कलमबंद आंदोलन की घोषणा की है। इसका मुख्य केंद्र नया रायपुर स्थित तूता धरना स्थल होगा, जहां रायपुर संभाग की मितानिनें 7 अगस्त को प्रदर्शन करेंगी।
इसके बाद 8 अगस्त को दुर्ग, 9 अगस्त को बिलासपुर, 10 अगस्त को सरगुजा और 11 अगस्त को बस्तर संभाग की मितानिनें विरोध जताएंगी। आंदोलन का कारण है सरकार द्वारा चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वादों का पूरा नहीं होना।
प्रमुख मांगें:
- मितानिन, प्रशिक्षक और फैसिलिटेटरों को NHM के अंतर्गत लाने का वादा पूरा हो।
- दिल्ली की NGO को सौंपे गए कार्यक्रम संचालन को वापस लिया जाए।
- स्थायी वेतन और सेवा शर्तों की गारंटी दी जाए।
संघ ने स्पष्ट किया कि अगर मांगे नहीं मानी गईं, तो राज्यव्यापी कार्य बहिष्कार और कलमबंद आंदोलन जारी रहेगा। 29 जुलाई को भी रायपुर में बड़े स्तर पर प्रदर्शन हो चुका है।
प्रदेश में 72,000 से अधिक मितानिनें कार्यरत हैं, जो गांव-शहर में मातृ शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा का जिम्मा संभालती हैं। लेकिन वर्षों से नियमितिकरण और सेवा शर्तों की अनदेखी ने इनकी नाराजगी बढ़ा दी है।