उपराष्ट्रपति इस्तीफा बयान: अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया ने बढ़ाया सियासी तापमान
21 जुलाई 2025 को भारत के 14वें उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने यह कदम उठाया, जबकि उनके कार्यकाल के दो साल अभी बाकी थे।
धनखड़ के इस फैसले ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है और विभिन्न दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।
इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि यह पूरी तरह व्यक्तिगत फैसला है।
उन्होंने कहा कि उपराष्ट्रपति का स्वास्थ्य कारणों से दिया गया इस्तीफा राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए।
हालांकि, अखिलेश ने इस मौके पर बीजेपी पर निशाना साधते हुए कई गंभीर आरोप भी लगाए हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा लोकतंत्र को लगातार कमजोर कर रही है और आम जनता को वोट डालने से रोका जा रहा है।
अखिलेश ने यह भी दावा किया कि उत्तर प्रदेश में हजारों असली वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे।
समाजवादी पार्टी ने ऐसे 18 हजार जीवित लोगों की सूची भी चुनाव आयोग को सौंपी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि यह सब जानबूझकर किया जा रहा है ताकि लोकतंत्र की जड़ें कमजोर की जा सकें।
वहीं, धनखड़ के इस्तीफे की टाइमिंग भी विपक्ष के निशाने पर है क्योंकि यह मानसून सत्र के पहले दिन ही आया है।
स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर दिया गया इस्तीफा विपक्ष को संदेहास्पद लग रहा है और राजनीतिक विश्लेषकों को भी।
अब सभी की निगाहें यह जानने पर टिकी हैं कि क्या वाकई यह इस्तीफा केवल स्वास्थ्य कारणों से जुड़ा था या फिर इसमें कोई गहराई छिपी है।
उपराष्ट्रपति इस्तीफा बयान अब हर मंच पर चर्चा का विषय बना हुआ है और राजनीतिक हलकों में इसकी गंभीरता को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।