सोशल मीडिया पर इन दिनों कॉकरोच पार्टी तेजी से चर्चा का विषय बनी हुई है। दरअसल, यह एक व्यंग्यात्मक राजनीतिक आंदोलन है, जिसने महज कुछ दिनों में इंस्टाग्राम पर करोड़ों फॉलोवर्स जुटा लिए हैं। 16 मई को शुरू हुए इस प्लेटफॉर्म ने 21 मई तक भाजपा और कांग्रेस जैसे बड़े राजनीतिक दलों को भी फॉलोवर्स के मामले में पीछे छोड़ दिया।
हालांकि इस आंदोलन की शुरुआत भारत के मुख्य न्यायाधीश की उस टिप्पणी के बाद हुई, जिसमें बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से की गई थी। वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया यूजर्स ने इसी शब्द को एक नई राजनीतिक पहचान में बदल दिया। नतीजतन, कॉकरोच पार्टी अब जेन जी युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय होती जा रही है।
इंस्टाग्राम पर रिकॉर्ड फॉलोवर्स
फिलहाल कॉकरोच पार्टी के इंस्टाग्राम पेज पर 1.35 करोड़ से ज्यादा फॉलोवर्स बताए जा रहे हैं। इसके अलावा भाजपा के करीब 88 लाख और कांग्रेस के लगभग 1.33 करोड़ फॉलोअर्स हैं। खासतौर पर युवाओं के बीच इस प्लेटफॉर्म की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।
क्या है कॉकरोच पार्टी का मकसद?
यह व्यंग्यात्मक आंदोलन खुद को बेरोजगार और अनदेखे युवाओं की आवाज बताता है। पार्टी का कहना है कि भारतीय राजनीति असली मुद्दों से दूर हो चुकी है। इसलिए यह आंदोलन रोजगार, शिक्षा, एआई, उद्योग और स्वच्छ ऊर्जा जैसे मुद्दों को सामने लाने की बात कर रहा है।
इसके अलावा कॉकरोच पार्टी ने न्यायपालिका, मीडिया और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं की स्वतंत्रता पर भी जोर दिया है। वहीं प्लेटफॉर्म ने महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण और दलबदल पर सख्त कार्रवाई जैसी मांगें भी रखी हैं।
कौन हैं अभिजीत दिपके?
इस आंदोलन के संस्थापक अभिजीत दिपके हैं, जिन्होंने पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की और बाद में अमेरिका की बॉस्टन यूनिवर्सिटी से मास्टर डिग्री हासिल की। वह पहले आम आदमी पार्टी के साथ भी काम कर चुके हैं। इसी बीच उन्होंने सोशल मीडिया रणनीति और राजनीतिक संचार में अपनी पहचान बनाई थी।
दरअसल, अभिजीत का कहना है कि युवाओं को लेकर की गई टिप्पणी ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से प्रभावित किया। इसके बाद उन्होंने व्यंग्य के जरिए कॉकरोच पार्टी की शुरुआत की, ताकि युवाओं की आवाज को एक मंच मिल सके।
क्या आगे चुनाव भी लड़ सकती है पार्टी?
हालांकि फिलहाल यह आंदोलन खुद को एक व्यंग्यात्मक प्लेटफॉर्म बता रहा है, लेकिन सोशल मीडिया पर इसकी लोकप्रियता ने राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा बढ़ा दी है। कुल मिलाकर यह साफ है कि कॉकरोच पार्टी ने युवाओं के बीच एक नई डिजिटल बहस को जन्म दे दिया है।
वहीं संस्थापक अभिजीत दिपके का कहना है कि अभी उनका फोकस युवाओं की समस्याओं को सुनने और लोगों से संवाद बढ़ाने पर है। साथ ही, आने वाले समय में यह आंदोलन किस दिशा में जाएगा, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।
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