जेन जी वोटर पर सियासत तेज, EC की भूमिका पर कांग्रेस के सवाल

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कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने जेन जी वोटर के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के 1988 के फैसले का उल्लेख किया। उस समय मतदान की न्यूनतम उम्र 21 से घटाकर 18 वर्ष की गई थी।

रमेश ने आरोप लगाया कि नए मतदाताओं को मतदाता सूची में जोड़ने की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। उन्होंने विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण यानी SSR को लेकर भी सवाल उठाए। हालांकि, ये कांग्रेस के आरोप हैं। चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर अलग स्थिति रखी है।

राजीव गांधी के फैसले का क्यों हुआ जिक्र?

जयराम रमेश ने 1988 के संविधान संशोधन को अपने ताजा बयान का आधार बनाया। 61वें संविधान संशोधन के जरिए मतदान की उम्र 21 से घटाकर 18 वर्ष की गई थी। यह बदलाव 1989 में प्रभावी हुआ था।

रमेश ने इस फैसले को युवाओं की राजनीतिक भागीदारी से जोड़कर पेश किया। उन्होंने कहा कि नए युवा मतदाताओं को चुनावी प्रक्रिया में शामिल करना जरूरी है। इसी संदर्भ में उन्होंने मौजूदा मतदाता सूची प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

मतदाता सूची को लेकर कांग्रेस का क्या दावा?

कांग्रेस का कहना है कि जेन जी वोटर के लिए मतदाता सूची में नाम जुड़ना महत्वपूर्ण है। पार्टी ने आरोप लगाया कि वार्षिक SSR प्रक्रिया 2024 के बाद पहले जैसी नहीं चली। रमेश के अनुसार, इसका असर नए पात्र मतदाताओं के पंजीकरण पर पड़ सकता है।

हालांकि, चुनाव आयोग की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक मतदाता पंजीकरण लगातार अपडेट की व्यवस्था से भी जुड़ा है। 2024 में आयोग ने बताया था कि SSR के बाद 18 से 29 वर्ष के दो करोड़ से अधिक युवा मतदाता जुड़े थे।

चुनाव आयोग और आयुक्तों की आपत्तियों का मुद्दा

इस पूरे विवाद में चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों का मुद्दा भी सामने आया है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कई मामलों में रिकॉर्ड पर आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें मतदाता पंजीकरण और फॉर्म 6 से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए।

चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेदों की खबरों पर कहा कि अलग-अलग विचार और टिप्पणियां संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा हैं। आयोग के अनुसार, SIR समेत उसके फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए हैं।

आगे क्या रहेगा अहम?

जेन जी वोटर को लेकर बहस अब मतदाता सूची की प्रक्रिया तक पहुंच गई है। पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में दर्ज होना चुनावी प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। चुनाव आयोग के अनुसार 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र वाले पात्र भारतीय नागरिक मतदाता के रूप में पंजीकरण करा सकते हैं।

इस विवाद में कांग्रेस के आरोप और चुनाव आयोग का पक्ष अलग-अलग हैं। इसलिए मतदाता सूची से जुड़े आधिकारिक रिकॉर्ड और संबंधित प्रक्रियाओं को देखना महत्वपूर्ण रहेगा।


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