कमलजीत सिंह ने एशियाड में जीता शूटिंग का गोल्ड, बनाया एशियाई रिकॉर्ड

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हरियाणा के रेवाड़ी से निकले कमलजीत सिंह ने एशियाई खेलों में शानदार उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने सुरुचि सिंह के साथ 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम में गोल्ड जीता। भारतीय जोड़ी ने फाइनल में 484.6 अंक बनाए। इस स्कोर के साथ नया एशियाई खेल रिकॉर्ड भी बना।

हालांकि, इस मुकाम तक पहुंचना उनके लिए आसान नहीं था। कमलजीत का पहला खेल शूटिंग नहीं, बल्कि एथलेटिक्स था। एक चोट ने उनके ट्रैक करियर को अचानक रोक दिया। इसके बाद उन्होंने पिस्टल शूटिंग को अपना नया रास्ता बनाया।

एथलेटिक्स का सपना चोट से टूटा

रेवाड़ी के सुलखा गांव से आने वाले कमलजीत बचपन में धावक बनना चाहते थे। उन्होंने ट्रैक एंड फील्ड में करियर बनाने की तैयारी शुरू की थी। लेकिन 2019 में लगी चोट ने उनका एथलेटिक्स करियर खत्म कर दिया। उस समय उनकी उम्र करीब 15 साल थी।

खेल छोड़ने के बजाय उन्होंने नई शुरुआत करने का फैसला किया। इसी दौरान उनका रुख पिस्टल शूटिंग की तरफ हुआ। एक नए खेल में शुरुआत करना उनके लिए बड़ी चुनौती थी। फिर भी उन्होंने लगातार अभ्यास जारी रखा।

आर्थिक मुश्किलों के बीच जारी रखा सफर

शूटिंग एक महंगा खेल है। कोचिंग, प्रतियोगिताओं और उपकरणों का खर्च भी काफी होता है। कमलजीत को शुरुआती दौर में आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कुछ समय ऐसा भी आया, जब उन्होंने खेल छोड़ने पर विचार किया।

हालांकि, उनके माता-पिता ने उनका साथ नहीं छोड़ा। परिवार ने उनकी ट्रेनिंग जारी रखने में मदद की। इस समर्थन ने उनके दूसरे खेल करियर को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।

कमलजीत सिंह ने जूनियर स्तर पर बनाई पहचान

कमलजीत सिंह ने धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय शूटिंग में अपनी पहचान बनाई। 2023 में उन्होंने ISSF जूनियर विश्व चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन किया। चांगवोन में उन्होंने पुरुषों की 50 मीटर पिस्टल स्पर्धा में गोल्ड जीता।

इसके बाद उन्होंने सीनियर स्तर की प्रतियोगिताओं में कदम रखा। वह 10 मीटर एयर पिस्टल और 50 मीटर पिस्टल में प्रतिस्पर्धा करने लगे। लगातार प्रदर्शन के बाद उन्हें भारतीय टीम में जगह मिली।

एशियाड में व्यक्तिगत स्पर्धा का मौका नहीं मिला

एशियाई खेलों में कमलजीत की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। पुरुषों की व्यक्तिगत 10 मीटर एयर पिस्टल क्वालिफिकेशन में वह नौवें स्थान पर रहे। वह फाइनल में जगह बनाने से केवल एक अंक दूर रह गए।

सिर्फ दो शूटरों के नियम के कारण उन्हें आगे बढ़ने का मौका नहीं मिला। इसके बाद उनके सामने मिश्रित टीम स्पर्धा का अवसर आया। यह जोड़ी शुरुआत में कमलजीत और सुरुचि की तय जोड़ी नहीं थी।

आखिरी समय में बदली जोड़ी

सुरुचि सिंह के मूल साथी केदारलिंग बालकृष्ण उचागनवे थे। लेकिन पुरुष क्वालिफिकेशन में कमलजीत के प्रदर्शन के बाद बदलाव हुआ। कमलजीत को सुरुचि के साथ मिश्रित टीम में उतारा गया।

यह बदलाव भारतीय टीम के लिए निर्णायक साबित हुआ। दोनों ने क्वालिफिकेशन में 587 अंक हासिल किए। इस स्कोर में 29 इनर-10 शामिल थे। भारतीय जोड़ी ने क्वालिफिकेशन में पहला स्थान हासिल किया।

फाइनल में बनाया नया एशियाई रिकॉर्ड

फाइनल में भारतीय जोड़ी ने शुरुआत से बढ़त बनाए रखी। दक्षिण कोरिया की जोड़ी ने दबाव बनाने की कोशिश की। लेकिन कमलजीत और सुरुचि ने अपनी लय कायम रखी।

दोनों ने आखिर में 484.6 अंक हासिल किए। इस स्कोर के साथ भारत ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया। दक्षिण कोरिया को 478.0 अंक के साथ सिल्वर मिला। ईरान ने 415.8 अंक के साथ ब्रॉन्ज जीता।

भारतीय जोड़ी ने पिछला एशियाई रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया। इस उपलब्धि ने भारतीय शूटिंग अभियान को भी खास शुरुआत दी।

ट्रैक से शूटिंग रेंज तक पहुंची कहानी

कमलजीत सिंह की यात्रा खेल बदलने की कहानी भी है। एथलेटिक्स में लगी चोट ने उनका पहला सपना जरूर बदल दिया। लेकिन उन्होंने खेल से अपना रिश्ता खत्म नहीं किया।

उन्होंने शूटिंग में नई शुरुआत की और लगातार आगे बढ़े। आर्थिक मुश्किलों के बावजूद उनका परिवार साथ खड़ा रहा। जूनियर स्तर पर मिली सफलता ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया।

इसके बाद उन्होंने सीनियर स्तर पर अपनी जगह बनाई। अब एशियाई खेलों में उनके नाम गोल्ड दर्ज हो चुका है।

दूसरे मौके को बनाया यादगार

कमलजीत सिंह को व्यक्तिगत स्पर्धा में फाइनल नहीं मिला। इसके बाद मिश्रित टीम में उन्हें नया अवसर मिला। उन्होंने सुरुचि के साथ मिलकर उस मौके को पदक में बदला।

484.6 अंक के साथ यह पदक रिकॉर्ड के साथ आया। उनकी कहानी बताती है कि खेल करियर हमेशा एक सीधी राह नहीं होता।

एक चोट ने उनका पहला सपना बदला। नई चुनौती ने उन्हें दूसरी दिशा दिखाई। एशियाड के मंच पर उसी दिशा ने उन्हें स्वर्ण पदक तक पहुंचाया।



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