भारतीय ग्रीको रोमन पहलवान Vikrant Singh एक बार फिर चर्चा में हैं। Vikrant Singh Doping मामले ने भारतीय कुश्ती जगत में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक डोप टेस्ट में फेल होने और अस्थायी प्रतिबंध लगने के बावजूद विक्रांत सिंह लखनऊ में चल रहे नेशनल कैंप में मौजूद रहे।
एशियाई चैंपियनशिप ट्रायल में भी लिया हिस्सा
Vikrant Singh Doping विवाद तब और बढ़ गया जब जानकारी सामने आई कि उन्होंने अंडर-23 एशियाई चैंपियनशिप के ट्रायल में भी हिस्सा लिया।
बताया गया कि ट्रायल में हारने के बाद वह कैंप में वापस नहीं लौटे। हालांकि नियमों के अनुसार अस्थायी प्रतिबंध लगने के बाद किसी खिलाड़ी को खेल गतिविधियों में भाग लेने की अनुमति नहीं होती।
तीन प्रतिबंधित पदार्थ पाए गए
National Anti Doping Agency यानी नाडा की जांच में विक्रांत सिंह के सैंपल में तीन प्रतिबंधित पदार्थ पाए गए। Vikrant Singh Doping मामले में स्टेरॉयड स्टेनोजोलॉल, टैमोक्सीफेन और लैट्रोजोल जैसे पदार्थ मिलने की जानकारी सामने आई है।
सूत्रों के अनुसार एक से अधिक प्रतिबंधित पदार्थ मिलने पर खिलाड़ी पर आठ साल तक का प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
WFI ने दी सफाई
भारतीय कुश्ती महासंघ Wrestling Federation of India का कहना है कि उन्हें समय पर नाडा की ओर से जानकारी नहीं मिली थी। Vikrant Singh Doping मामले में महासंघ ने दावा किया कि अगर सूचना पहले मिलती, तो खिलाड़ी को तुरंत कैंप से बाहर कर दिया जाता।
इसके अलावा यह भी बताया गया कि विक्रांत ने नोटिस का जवाब नहीं दिया और बी सैंपल टेस्ट की मांग भी नहीं की।
भारतीय कुश्ती पर फिर उठे सवाल
Vikrant Singh Doping विवाद ने एक बार फिर भारतीय कुश्ती प्रशासन और डोपिंग नियंत्रण प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में समय पर कार्रवाई और पारदर्शिता बेहद जरूरी है, ताकि खेल की साख बनी रहे।
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