तमिलनाडु के तिरुवल्लुवर जिले में हुए अमोनिया गैस रिसाव ने राज्य में चिंता और राजनीतिक बहस दोनों को बढ़ा दिया है। औद्योगिक इकाई में हुई इस घटना में मृतकों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है, जबकि दर्जनों श्रमिक अभी भी उपचाराधीन हैं। तमिलनाडु गैस हादसा अब विधानसभा से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।
अमोनिया रिसाव से कैसे बिगड़े हालात?
यह घटना एक निजी सीफूड प्रोसेसिंग और निर्यात इकाई में हुई, जहां नियमित कार्य के दौरान अचानक अमोनिया गैस का रिसाव हो गया। गैस के संपर्क में आने से बड़ी संख्या में श्रमिक प्रभावित हुए और उन्हें अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा।
पांच महिला श्रमिकों की गई जान
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पहले दो महिला श्रमिकों की मौत हुई थी, जबकि बाद में उपचार के दौरान तीन अन्य महिलाओं ने भी दम तोड़ दिया। इसके साथ ही तमिलनाडु गैस हादसा और अधिक गंभीर हो गया है।
सरकार ने क्या कदम उठाए?
घटना के बाद राज्य सरकार ने तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की संयुक्त जांच समिति गठित की है।
24 घंटे में मांगी गई प्रारंभिक रिपोर्ट
सरकार ने जांच दल को 24 घंटे के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट और तीन दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। अधिकारियों को यह भी पता लगाने की जिम्मेदारी दी गई है कि हादसे के पीछे कोई सुरक्षा चूक थी या नहीं।
74 श्रमिक हुए प्रभावित
मंत्री के अनुसार, गैस रिसाव की चपेट में कुल 74 श्रमिक आए थे, जिनमें बड़ी संख्या में महिला कर्मचारी शामिल थीं। प्रभावित लोगों को विभिन्न सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
अभी भी जारी है इलाज
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि अधिकांश मरीजों का इलाज जारी है। कई श्रमिकों में सांस लेने में कठिनाई, आंखों में जलन, खांसी और सीने में दर्द जैसे लक्षण पाए गए। इन परिस्थितियों ने तमिलनाडु गैस हादसा को औद्योगिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण बना दिया है।
विधानसभा में क्यों हुआ हंगामा?
हादसे को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। विधानसभा में मंत्री के बयान के दौरान विपक्षी सदस्यों ने लगातार सवाल उठाए, जिससे सदन में तीखी बहस देखने को मिली।
एआईएडीएमके ने किया वॉकआउट
विपक्ष का आरोप है कि औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों का पर्याप्त पालन नहीं किया गया। अपनी मांगों पर चर्चा नहीं होने से नाराज विपक्षी सदस्यों ने सदन से वॉकआउट भी किया। इस वजह से तमिलनाडु गैस हादसा राजनीतिक विवाद का विषय बन गया है।
पीड़ित परिवारों के लिए राहत का ऐलान
राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही मृत श्रमिकों के पार्थिव शरीरों को उनके गृह राज्यों तक पहुंचाने का पूरा खर्च भी सरकार वहन करेगी।
जवाबदेही तय करने का आश्वासन
श्रम कल्याण मंत्री ने कहा कि जांच में यदि किसी व्यक्ति या संस्था की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि तमिलनाडु गैस हादसा मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
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