अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (ADAG) से जुड़ी कंपनियों पर लगे कथित बैंकिंग धोखाधड़ी के आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने केंद्रीय जांच एजेंसियों—केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED)—को इस मामले में निष्पक्ष, पारदर्शी और तटस्थ जांच करने का स्पष्ट निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि यह मामला जनहित से जुड़ा है और इसमें किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जा सकती। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि जांच एजेंसियां पहले ही इस मामले में समय की मांग कर चुकी हैं, ऐसे में अब उन्हें चार सप्ताह के भीतर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।
कोर्ट ने CBI और ED से अब तक की गई जांच, उठाए गए कदमों और आगे की कार्रवाई की पूरी जानकारी प्रस्तुत करने को कहा है। साथ ही, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कथित धोखाधड़ी में ADAG समूह की कंपनियों की भूमिका की गहन जांच आवश्यक है, क्योंकि इस प्रक्रिया में पहले ही पर्याप्त समय बीत चुका है।
इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी और ADAG समूह को भी अपना पक्ष रखने के लिए चार सप्ताह का समय प्रदान किया है। इससे साफ है कि अदालत इस मामले में सभी पक्षों को सुनकर निष्पक्ष निर्णय की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह आदेश संकेत देता है कि बैंकिंग धोखाधड़ी जैसे गंभीर मामलों में सुप्रीम कोर्ट जवाबदेही और पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। आने वाले हफ्तों में इस मामले की जांच किस दिशा में जाती है, इस पर देशभर की नजरें टिकी रहेंगी।