छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के जानडीह कौर गांव में हेमसिंह नेताम नाला पार कर रोज़ करीब 20 बच्चों को स्कूल पहुंचाते हैं। यह सिलसिला तब शुरू हुआ जब उनकी बहन जमुना नेताम, 12 साल पहले बरसात के दौरान बाढ़ में बह गई थी।
बहन की मौत से मिली प्रेरणा
जमुना नेताम उस समय नौंवी कक्षा की छात्रा थी। वह ट्यूब के सहारे बाकड़ी पैरी नाले को पार करते हुए बाढ़ में बह गई। इस घटना के बाद गांव के बच्चों में डर बैठ गया और कई ने स्कूल छोड़ने तक का फैसला कर लिया। लेकिन हेमसिंह ने हार नहीं मानी और सभी बच्चों को नाले के पार सुरक्षित पहुंचाने का बीड़ा उठा लिया।
20 बच्चे रोज़ करते हैं जोखिम का सफर
आज भी नाले पर पुल नहीं है। बारिश के मौसम में पानी का बहाव तेज होता है, जिससे छात्रों की जान हर दिन जोखिम में रहती है। बच्चों को पहले तेज बहाव वाले नाले को पार करना होता है और फिर 2 किमी का जंगली रास्ता तय कर स्कूल पहुंचना होता है।
यह केवल छात्रों की ही नहीं, बल्कि लगभग 1,000 लोगों की आबादी के लिए भी गंभीर समस्या है। बालकिशन सोरी, उपसरपंच, बताते हैं कि हेमसिंह की वजह से आज भी गांव के बच्चे स्कूल जा पा रहे हैं। वह हर दिन सुरक्षा उपकरण लेकर बच्चों को नाले के उस पार छोड़ते हैं।
पुल की मंजूरी, लेकिन निर्माण अधर में
जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने बताया कि वर्ष 2023 में इस नाले सहित तीन स्थानों पर पुल बनाने की मंजूरी मिली थी। दो जगहों पर काम शुरू हो गया, लेकिन बाकड़ी पैरी नाले पर काम शुरू नहीं हो पाया। संजय नेताम ने कहा कि वे अब इस पर कार्रवाई के लिए हर स्तर पर पत्राचार कर रहे हैं।
विभागीय प्रतिक्रिया: बारिश के बाद शुरू होगा काम
पीडब्ल्यूडी सेतु शाखा के एसडीओ एस.के. पंडोले के अनुसार, बोरवेल खुदाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद डीपीआर बनेगी और फिर तकनीकी स्वीकृति के बाद निर्माण शुरू होगा। उनका दावा है कि बारिश के बाद काम जल्द ही शुरू किया जाएगा।
हेमसिंह नेताम नाला पार कर बच्चों की शिक्षा को 12 साल से जारी रखे हुए हैं। यह कहानी प्रेरणा देती है कि एक व्यक्ति की पहल पूरे गांव की दिशा बदल सकती है।