भारत सरकार ने हाल के दिनों में कई बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को सोशल मीडिया नोटिस जारी किए हैं। इन नोटिसों का उद्देश्य नए फीचर्स, ऑनलाइन सुरक्षा, फर्जी पहचान, साइबर धोखाधड़ी और अवैध कंटेंट को लेकर कंपनियों से जवाब मांगना है। सरकार का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को यूजर सुरक्षा और भारतीय कानूनों का पालन सुनिश्चित करना होगा।
सरकार ने किन कंपनियों को भेजे नोटिस?
इस कार्रवाई के दायरे में चार बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आए हैं। इनमें WhatsApp, Instagram, Telegram और Signal शामिल हैं। सभी कंपनियों को अलग-अलग मामलों में स्पष्टीकरण देने के लिए कहा गया है।
प्रमुख प्लेटफॉर्म और वजह
- WhatsApp के यूजरनेम फीचर पर सवाल।
- Telegram और Signal की पहचान छिपाने वाली सुविधा पर चिंता।
- Telegram पर पायरेटेड कंटेंट को लेकर अलग नोटिस।
- Instagram की विज्ञापन समीक्षा प्रक्रिया पर जवाब तलब।
WhatsApp के नए फीचर पर सरकार की चिंता
सरकार ने सोशल मीडिया नोटिस के तहत WhatsApp के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर पर आपत्ति जताई है। इस फीचर से यूजर बिना मोबाइल नंबर साझा किए बातचीत कर सकेंगे।
सरकार का मानना है कि इससे फर्जी पहचान बनाकर साइबर फ्रॉड, फिशिंग और डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराध बढ़ सकते हैं। इसी वजह से फीचर के रोलआउट से पहले कंपनी से विस्तृत जानकारी मांगी गई है।
WhatsApp ने क्या कहा?
WhatsApp ने स्पष्ट किया कि फीचर अभी लॉन्च नहीं हुआ है। कंपनी ने कहा कि इसे अतिरिक्त सुरक्षा उपायों के साथ चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा। साथ ही वैध मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन अनिवार्य रहेगा।
Telegram और Signal पर क्यों उठे सवाल?
सरकार की चिंता केवल WhatsApp तक सीमित नहीं है। Telegram और Signal के यूजरनेम आधारित मैसेजिंग सिस्टम पर भी सवाल उठाए गए हैं।
सरकार जानना चाहती है कि दोनों प्लेटफॉर्म फर्जी पहचान और ऑनलाइन ठगी रोकने के लिए कौन-कौन से सुरक्षा उपाय अपना रहे हैं।
Telegram को एक अलग नोटिस भी भेजा गया है, जिसमें प्लेटफॉर्म पर पायरेटेड फिल्में और ओटीटी कंटेंट के प्रसार पर जवाब मांगा गया है।
Instagram पर विज्ञापन विवाद
सोशल मीडिया नोटिस के तहत Instagram की पैरेंट कंपनी Meta से उसकी विज्ञापन समीक्षा प्रक्रिया पर भी जवाब मांगा गया है।
एक मीडिया जांच में दावा किया गया कि कुछ पेड विज्ञापन कथित तौर पर अवैध सामग्री को बढ़ावा दे रहे थे। इसके बाद सरकार ने पूछा कि ऐसे विज्ञापन प्लेटफॉर्म पर कैसे स्वीकृत हुए।
Meta का जवाब
Meta ने कहा कि बाल सुरक्षा और अवैध सामग्री के खिलाफ उसकी जीरो-टॉलरेंस नीति है। संबंधित विज्ञापनों और खातों को हटाया जा चुका है। कंपनी ने बताया कि वह AI और विशेषज्ञ टीमों की मदद से लगातार निगरानी करती है।
सरकार की मुख्य चिंताएं क्या हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार सरकार की प्राथमिक चिंता डिजिटल सुरक्षा और यूजर संरक्षण है। खासकर ऐसे फीचर्स, जिनका दुरुपयोग अपराधी कर सकते हैं।
मुख्य बिंदु
- फर्जी पहचान बनाकर साइबर फ्रॉड।
- डिजिटल अरेस्ट और फिशिंग का खतरा।
- कॉपीराइट उल्लंघन और पायरेसी।
- अवैध विज्ञापनों की निगरानी।
- बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा।
कंपनियों को कितना समय मिला?
सरकार ने सभी कंपनियों के लिए अलग-अलग समयसीमा तय की है।
- WhatsApp को 9 जुलाई तक जवाब देना है।
- Meta को Instagram मामले में 11 जुलाई तक रिपोर्ट देनी होगी।
- Telegram को पायरेसी मामले में 15 दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट सौंपनी है।
- Signal और Telegram के यूजरनेम फीचर पर भी स्पष्टीकरण मांगा गया है।
क्या हो सकती है आगे की कार्रवाई?
यदि कंपनियों का जवाब संतोषजनक नहीं होता, तो सोशल मीडिया नोटिस के बाद सरकार सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और अन्य संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई कर सकती है।
Telegram के मामले में कॉपीराइट कानून और सिनेमैटोग्राफ अधिनियम के तहत भी कानूनी कार्रवाई संभव है। वहीं WhatsApp के यूजरनेम फीचर को भारत में अनुमति मिलने या न मिलने का फैसला भी सरकार के मूल्यांकन पर निर्भर करेगा।
एक नजर में
- चार प्रमुख प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी।
- यूजर सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता।
- WhatsApp फीचर पर फिलहाल सवाल।
- Instagram से विज्ञापन प्रक्रिया पर जवाब मांगा गया।
- Telegram पर पायरेसी को लेकर अलग कार्रवाई।
विशेषज्ञों की राय
कुछ तकनीकी विशेषज्ञ सरकार की सुरक्षा चिंताओं को उचित मानते हैं। वहीं इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (IFF) ने नोटिसों की कानूनी वैधता पर सवाल उठाए हैं। संस्था का कहना है कि किसी फीचर को लॉन्च से पहले रोकने का स्पष्ट कानूनी आधार सरकार को बताना चाहिए।
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