साबयसाची मेट ज्वेलरी कोलैबोरेशन के ऐलान के साथ फैशन की दुनिया में आज एक ऐतिहासिक पल दर्ज हुआ, जब भारतीय डिज़ाइनर साबयसाची मुखर्जी ने अमेरिका के मशहूर मेट्रोपॉलिटन म्यूज़ियम ऑफ आर्ट के साथ मिलकर एक बहु-वर्षीय हाई ज्वेलरी परियोजना का ऐलान किया. 15 सितंबर को न्यूयॉर्क फैशन वीक के मंच पर हुए इस शो के साथ साबयसाची ने पूरे 17 साल बाद अमेरिकी रनवे पर वापसी की
साबयसाची मेट ज्वेलरी कोलैबोरेशन में द मेट के 5,000 साल के आर्ट से प्रेरणा
इस साबयसाची मेट ज्वेलरी कोलैबोरेशन का मकसद द मेट के विशाल कला संग्रह को गहनों की भाषा में ढालना है. पहले चैप्टर के लिए बीजान्टिन साम्राज्य को चुना गया, जो चौथी से पंद्रहवीं सदी तक कॉन्स्टेंटिनोपल में फला-फूला था. साबयसाची ने ग्रीक-रोमन, मध्यकालीन और इस्लामिक आर्ट विभागों की वस्तुओं, प्रतिमाओं और नक्काशी से प्रेरणा लेकर यह डिज़ाइन तैयार किए हैं.
रनवे पर दिखे कौन-कौन से पीस
कलेक्शन में एक 18-22 कैरेट गोल्ड कफ खास आकर्षण का केंद्र रहा, जिसे तीसरी सदी के रोमन मार्बल सारकोफेगस से प्रेरित गार्नेट पत्थरों से सजाया गया है. इसके साथ ही टूरमलाइन और जेड से बना टाइगर-क्लॉ नेकलेस भी पेश किया गया, जो बारहवीं सदी के बीजान्टिन कास्केट पर आधारित है. एक पेंडेंट में 210 कैरेट की तराशी हुई जैस्पर का इस्तेमाल हुआ है, जो तेरहवीं-पंद्रहवीं सदी के एक कैमियो से प्रेरित है.
हर पीस भारत में हाथ से बना
इस पूरे प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि डिज़ाइन भले ही पश्चिमी इतिहास से प्रेरित हों, लेकिन हर आभूषण भारत में कारीगरों के हाथों से तैयार हो रहा है. यह भारतीय शिल्पकला की बारीकी और वैश्विक स्तर पर उसकी स्वीकार्यता दोनों को दर्शाता है.
क्यों खास मानी जा रही है यह वापसी
साबयसाची ने आखिरी बार 2009 में न्यूयॉर्क के रनवे पर कदम रखा था. लगभग दो दशक बाद हुई यह वापसी सिर्फ एक शो नहीं, बल्कि भारतीय लग्जरी ब्रांड्स के लिए वैश्विक पहचान की एक नई शुरुआत मानी जा रही है. फैशन जगत के जानकारों का मानना है कि इससे भारतीय डिज़ाइन सोच को अंतरराष्ट्रीय लग्जरी बाजार में और मजबूती मिलेगी.
खरीदारी के लिए कहां मिलेगा यह कलेक्शन
शो के बाद यह ज्वेलरी कलेक्शन साबयसाची के न्यूयॉर्क स्थित फ्लैगशिप स्टोर पर उपलब्ध होगी, जो वेस्ट विलेज के क्रिस्टोफर स्ट्रीट पर स्थित है. इसके अलावा साबयसाची के अन्य स्टोर्स और दुनियाभर के चुनिंदा रिटेलर्स पर भी यह कलेक्शन खरीदा जा सकेगा.
भारतीय डिज़ाइन के लिए इसका बड़ा मतलब
यह कोलैबोरेशन दिखाता है कि भारतीय हस्तकला अब सिर्फ पारंपरिक बाजार तक सीमित नहीं रही, बल्कि दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित सांस्कृतिक संस्थानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हो रही है.
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