औपनिवेशिक मानसिकता की पहचान मिटाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम
केंद्र सरकार ने मंगलवार को एक बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का नाम बदलकर ‘सेवा तीर्थ’ कर दिया है। इसके साथ ही केंद्रीय सचिवालय का नाम ‘कर्तव्य भवन’ किया गया है। यही नहीं, पूरे देश में राजभवनों के नाम बदलकर ‘लोकभवन’ करने का भी एलान किया गया है — ताकि औपनिवेशिक संस्कृति और शब्दावली का प्रभाव पूरी तरह खत्म किया जा सके।
8 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश ने लागू किया नया नाम
गृह मंत्रालय के निर्देशों के बाद पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम, उत्तराखंड, ओडिशा, गुजरात और त्रिपुरा ने राजभवन का नाम बदलकर लोकभवन कर दिया है। वहीं लद्दाख के राज निवास को अब ‘लोक निवास’ के नाम से जाना जाएगा। इसके बाद राजस्थान ने भी अपने राजभवन का नाम बदलने की घोषणा कर दी है।
गृह मंत्रालय का निर्देश
राज्यपालों और उपराज्यपालों के मुख्य सचिवों को लिखे गए पत्र में गृह मंत्रालय ने बताया कि ‘राजभवन’ शब्द औपनिवेशिक मानसिकता की याद दिलाता है, इसलिए कार्यालयों के लिए लोकभवन और लोक निवास जैसे नाम अपनाए जाने चाहिए। यह निर्णय पिछले वर्ष आयोजित राज्यपालों के सम्मेलन में दिए गए सुझाव के आधार पर लिया गया है।
पहले भी हुए हैं ऐतिहासिक बदलाव
यह पहली बार नहीं है जब केंद्र सरकार ने उपनिवेशवाद से जुड़े नामों में परिवर्तन किया है।
पिछले वर्षों में भी प्रमुख बदलाव किए गए हैं —
🔹 राजपथ → कर्तव्य पथ
🔹 प्रधानमंत्री आवास → लोक कल्याण मार्ग
🔹 बीटिंग रिट्रीट में विदेशी धुनों की जगह भारतीय बैंड
🔹 सरकारी वेबसाइटों पर हिंदी को प्राथमिकता
क्यों माना जा रहा है यह निर्णय खास?
सरकार का उद्देश्य है —
✔ औपनिवेशिक मानसिकता समाप्त करना
✔ भारतीय संस्कृति और मूल्यों को बढ़ावा देना
✔ शासन तंत्र को सेवा-उन्मुख पहचान देना