नक्सल क्षेत्र में पशु अस्पताल खुला

आईटीबीपी ने पहली बार छत्तीसगढ़ के नक्सल क्षेत्र सीतागांव में पशुओं के लिए फ्री फील्ड अस्पताल खोला है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) ने पशु अस्पताल नक्सल क्षेत्र में पहली बार खोलकर नई पहल की शुरुआत की है।
मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के सीतागांव गांव में यह फील्ड अस्पताल स्थापित किया गया है।

यह गांव रायपुर से लगभग 150 किलोमीटर दूर स्थित है और महाराष्ट्र सीमा के पास है।
यह कदम केंद्र सरकार की योजना के तहत लिया गया है, जिसका लक्ष्य मार्च 2026 तक नक्सल हिंसा समाप्त करना है।

🐄 12,000 पशुओं की देखभाल का लक्ष्य

अस्पताल सीतागांव और आसपास के 20 गांवों के 12,000 से अधिक पशुओं की देखभाल करेगा।
इनमें गाय, बैल, बकरियां, मुर्गियां, सूअर और कुत्ते शामिल हैं, जो ग्रामीणों की आय का मुख्य स्रोत हैं।

आईटीबीपी की 27वीं बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर विवेक कुमार पांडे ने इसका उद्घाटन किया।
इसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण अपने पशुओं के साथ अस्पताल पहुंचे।

🆓 पूरी तरह निशुल्क इलाज

आईटीबीपी के डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ द्वारा इस अस्पताल में पशुओं की नियमित मुफ्त जांच की जाएगी।
सीतागांव क्षेत्र में यह पहली स्वस्थ्य सुविधा है जो पूरी तरह से निशुल्क होगी।

📊 सरकारी सर्वे से बनी योजना

एक सरकारी सर्वे में पाया गया कि क्षेत्र में मौजूद हजारों पशु स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में समय पर इलाज नहीं पाते।
इसी के बाद आईटीबीपी ने यह फील्ड अस्पताल शुरू करने का निर्णय लिया।

🏥 अस्पताल की सुविधाएं

अस्पताल में बड़े पशुओं के लिए बाड़ा, दवाओं का कमरा, प्रक्रिया कक्ष, और पंजीकरण डेस्क भी बनाया गया है।

🚔 सीएम का दौरा

16 मई को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सीतागांव आईटीबीपी कैंप का दौरा किया।
उन्होंने जवानों से बातचीत कर इस पहल की सराहना की और स्थानीय जरूरतों को प्राथमिकता देने की बात कही।

🌐 आईटीबीपी की प्रमुख भूमिका

आईटीबीपी आमतौर पर चीन सीमा पर 3,488 किमी की LAC की रक्षा करता है।
इसके अलावा, यह नक्सल विरोधी अभियानों और स्थानीय जनकल्याण कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाता है।

यह पहली बार है जब वामपंथी उग्रवाद (LWE) क्षेत्र में स्थायी पशु चिकित्सा सुविधा की शुरुआत हुई है।

यह भी पढ़ें – बिना डिग्री और पंजीयन के आयुर्वेद सेंटर, क्लिनिकों को दिया नोटिस


उदंती टाइगर की वापसी: 20 साल बाद जंगल में मिले बाघ के पगचिन्ह

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *