नेपाल में बाढ़ ने कई इलाकों में भारी तबाही मचा दी है। भूकंप के कुछ मिनट बाद अचानक तेज सैलाब आया। इससे सड़कें, पुल और कई ढांचागत सुविधाएं बह गईं। नेपाल के रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। आपदा के बाद बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं।
नेपाल सरकार के अनुसार, बुधवार सुबह तिब्बत क्षेत्र में भूकंप आया था। इसके करीब तीन मिनट बाद बाढ़ की सूचना मिली। शुरुआती जांच में ग्लेशियर टूटने की आशंका सामने आई है। इससे बड़ी मात्रा में पानी नदी घाटी की ओर तेजी से पहुंचा।
ग्लेशियर टूटने से आया अचानक सैलाब
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, करीब 17 हजार फीट की ऊंचाई पर ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूट गया। इसका करीब 2,000 फीट चौड़ा हिस्सा अलग होकर नीचे गिरा। विशाल हिमखंड लगभग 4,000 फीट नीचे नदी घाटी में पहुंचा।
इस घटना के बाद ल्हेंडे खोला नदी में तेज बहाव पैदा हुआ। पानी आगे बढ़कर भोटेकोशी नदी तक पहुंच गया। इसके कारण निचले इलाकों में अचानक बाढ़ जैसी स्थिति बन गई। विशेषज्ञों ने इसे ग्लेशियर से जुड़ी गंभीर प्राकृतिक आपदा बताया है।
100 मीटर ऊंची लहर ने मचाई तबाही
स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, पानी की विशाल दीवार तेजी से बाजार की ओर बढ़ी। प्रत्यक्षदर्शियों ने बहाव को करीब 100 मीटर ऊंची लहर जैसा बताया। कुछ ही समय में तिमुरे बाजार का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो गया।
नेपाल में बाढ़ से बुनियादी ढांचे को नुकसान
नेपाल में बाढ़ के कारण 22 कंक्रीट पुल बह गए। पांच बेली पुलों को भी नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा करीब 42 किलोमीटर सड़क बहने की जानकारी सामने आई है। कई जलविद्युत परियोजनाएं भी प्रभावित हुई हैं।
बाढ़ का असर नुवाकोट, चितवन, गोरखा और तनहुं तक पहुंचा। नवलपरासी ईस्ट में भी पानी फैलने की जानकारी मिली है। प्रशासन ने प्रभावित जिलों के लिए तत्काल राहत उपाय शुरू किए हैं।
मुख्य बातें
- तिब्बत क्षेत्र में भूकंप के बाद अचानक सैलाब आया।
- ग्लेशियर का करीब 2,000 फीट चौड़ा हिस्सा टूटने की बात सामने आई।
- 22 कंक्रीट और पांच बेली पुलों को नुकसान पहुंचा।
- करीब 42 किलोमीटर सड़क बहने की जानकारी है।
- कई जलविद्युत परियोजनाएं भी प्रभावित हुई हैं।
भारतीय पर्यटकों को लेकर बढ़ी चिंता
आपदा के कारण भारत के कई नागरिक प्रभावित हुए हैं। कोलकाता से कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर गया 32 सदस्यीय दल संपर्क से बाहर है। दल में 30 पर्यटक और दो टूर प्रबंधक शामिल हैं।
यह दल 21 अगस्त को कोलकाता से रवाना हुआ था। बुधवार सुबह दल रसुवागढ़ी क्षेत्र में पहुंचा था। इसके बाद अचानक बाढ़ आने से संपर्क टूट गया। प्रभावित क्षेत्र में संचार व्यवस्था बाधित होने से राहत कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
केरल के 37 पर्यटक भी नेपाल में फंसे हैं। हालांकि, उनके सुरक्षित होने की जानकारी सामने आई है। बाढ़ के कारण उनकी आगे की यात्रा रुक गई है। राज्य सरकार ने उनके संपर्क और सुरक्षित वापसी के लिए प्रयास शुरू किए हैं।
कई राज्यों ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर
नेपाल में बाढ़ के बाद कई भारतीय राज्यों ने नियंत्रण कक्ष सक्रिय किए हैं। इन माध्यमों से प्रभावित नागरिकों की जानकारी जुटाई जा रही है। केंद्र और भारतीय दूतावास के साथ भी समन्वय किया जा रहा है।
कर्नाटक ने नेपाल और तिब्बत में फंसे नागरिकों की जानकारी जुटानी शुरू की है। पश्चिम बंगाल सरकार भी प्रभावित यात्रियों के परिजनों के संपर्क में है। अन्य राज्यों ने भी आपातकालीन नंबर जारी किए हैं।
सहायता के लिए प्रमुख नंबर
- उत्तर प्रदेश: 1070
- महाराष्ट्र: 1070, +91-9321587143
- तेलंगाना: 9871999044, 9949351270, 9618597969
- कर्नाटक: 1070, 080-22253707
- केरल: 9447111844, 9737132147
- सिक्किम: 03592201145, 03592202461, 03592202256
भारतीय दूतावास ने भी प्रभावित नागरिकों के लिए सहायता नंबर जारी किए हैं। नागरिक +977 985 131 6807, +977 970 910 7500 और +977 981 032 6117 पर संपर्क कर सकते हैं। ये नंबर व्हाट्सऐप के माध्यम से भी उपलब्ध बताए गए हैं।
राहत और बचाव कार्य पर नजर
आपदा के बाद प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य जारी है। हालांकि, सड़कों और पुलों के टूटने से पहुंच प्रभावित हुई है। संचार व्यवस्था बाधित होने से लोगों की सही स्थिति जानना भी मुश्किल है।
प्रशासन प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों तक सहायता पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। वहीं, भारत सरकार और विभिन्न राज्य सरकारें अपने नागरिकों की जानकारी जुटा रही हैं। आने वाले समय में नुकसान का विस्तृत आकलन सामने आने की उम्मीद है।
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