किताबों की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने की सलाह – सुप्रीम कोर्ट

स्कूली पाठ्यपुस्तकों में प्रकाशित सामग्री को लेकर उठे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कक्षा आठ की सोशल साइंस की किताब में न्यायपालिका से जुड़ी आपत्तिजनक टिप्पणी सामने आने के बाद अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लिया। कोर्ट की नाराजगी के बाद केंद्र सरकार ने सभी कक्षाओं की किताबों की व्यापक समीक्षा कराने का फैसला किया है।

विशेषज्ञ समिति बनाने की सलाह

मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कहा कि केवल एनसीईआरटी को समीक्षा का निर्देश देने के बजाय अगर केंद्र सरकार पाठ्यक्रम की जांच के लिए विशेषज्ञों की स्वतंत्र समिति गठित करे तो यह अधिक प्रभावी कदम होगा।

सरकार ने दी समीक्षा की जानकारी

सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि केंद्र ने एनसीईआरटी को निर्देश दिया है कि वह सिर्फ कक्षा आठ की किताब ही नहीं, बल्कि सभी कक्षाओं की पाठ्यपुस्तकों की सामग्री की समीक्षा करे। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि इस प्रक्रिया में विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों का पैनल शामिल किया जाएगा।

एनसीईआरटी ने मांगी माफी

विवाद बढ़ने के बाद एनसीईआरटी के निदेशक ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बिना शर्त माफी मांगी है। साथ ही यह भी बताया गया कि संस्थान की प्रकाशन प्रक्रिया में सुधार के लिए कई बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। अब किसी भी नई सामग्री को प्रकाशित करने से पहले विशेषज्ञों की स्वीकृति अनिवार्य होगी।

किताबों के वितरण पर लगी रोक

इससे पहले अदालत ने 26 फरवरी को विवादित किताब की छपाई और उसके ऑनलाइन वितरण पर रोक लगाने का आदेश दिया था। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि किताब में प्रकाशित सामग्री न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली है। अदालत ने बाजार में उपलब्ध सभी प्रतियों को जब्त कर सार्वजनिक पहुंच से हटाने का निर्देश भी दिया।

इस मामले को शिक्षा व्यवस्था और संस्थागत गरिमा से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें पाठ्यपुस्तकों की सामग्री की विश्वसनीयता और जिम्मेदारी पर विशेष जोर दिया गया है।स्कूली पाठ्यपुस्तकों में प्रकाशित सामग्री को लेकर उठे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कक्षा आठ की सोशल साइंस की किताब में न्यायपालिका से जुड़ी आपत्तिजनक टिप्पणी सामने आने के बाद अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लिया। कोर्ट की नाराजगी के बाद केंद्र सरकार ने सभी कक्षाओं की किताबों की व्यापक समीक्षा कराने का फैसला किया है।

विशेषज्ञ समिति बनाने की सलाह

मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कहा कि केवल एनसीईआरटी को समीक्षा का निर्देश देने के बजाय अगर केंद्र सरकार पाठ्यक्रम की जांच के लिए विशेषज्ञों की स्वतंत्र समिति गठित करे तो यह अधिक प्रभावी कदम होगा।

सरकार ने दी समीक्षा की जानकारी

सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि केंद्र ने एनसीईआरटी को निर्देश दिया है कि वह सिर्फ कक्षा आठ की किताब ही नहीं, बल्कि सभी कक्षाओं की पाठ्यपुस्तकों की सामग्री की समीक्षा करे। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि इस प्रक्रिया में विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों का पैनल शामिल किया जाएगा।

एनसीईआरटी ने मांगी माफी

विवाद बढ़ने के बाद एनसीईआरटी के निदेशक ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बिना शर्त माफी मांगी है। साथ ही यह भी बताया गया कि संस्थान की प्रकाशन प्रक्रिया में सुधार के लिए कई बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। अब किसी भी नई सामग्री को प्रकाशित करने से पहले विशेषज्ञों की स्वीकृति अनिवार्य होगी।

किताबों के वितरण पर लगी रोक

इससे पहले अदालत ने 26 फरवरी को विवादित किताब की छपाई और उसके ऑनलाइन वितरण पर रोक लगाने का आदेश दिया था। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि किताब में प्रकाशित सामग्री न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली है। अदालत ने बाजार में उपलब्ध सभी प्रतियों को जब्त कर सार्वजनिक पहुंच से हटाने का निर्देश भी दिया।

इस मामले को शिक्षा व्यवस्था और संस्थागत गरिमा से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें पाठ्यपुस्तकों की सामग्री की विश्वसनीयता और जिम्मेदारी पर विशेष जोर दिया गया है।

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