मराठा आरक्षण आंदोलन की आग एक बार फिर तेज हो गई है। आंदोलन के नेता मनोज जरांगे ने मुंबई के आजाद मैदान में भूख हड़ताल शुरू कर दी है। शुक्रवार सुबह वे समर्थकों के साथ यहां पहुंचे और एक दिवसीय शांतिपूर्ण विरोध की शुरुआत की।
जरांगे ने जालना जिले से बुधवार को हजारों वाहनों के काफिले के साथ मार्च शुरू किया था। मुंबई पहुंचने पर वाशी में उनका भव्य स्वागत किया गया। बड़ी संख्या में उनके समर्थक पहले से ही मुंबई में डटे हुए हैं।
मराठा समुदाय की प्रमुख मांग
43 वर्षीय मनोज जरांगे मराठा समुदाय को ओबीसी श्रेणी में शामिल करने और सभी मराठाओं को कुनबी जाति का प्रमाणपत्र देने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे मराठाओं को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा।
जरांगे ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध शांतिपूर्ण रहेगा और गणेश उत्सव जैसी धार्मिक गतिविधियों में कोई बाधा नहीं डाली जाएगी।
पुलिस की सख्त शर्तें
जालना पुलिस ने जरांगे को मार्च की अनुमति 40 शर्तों के साथ दी थी। वहीं, मुंबई पुलिस ने भी प्रदर्शन पर नियंत्रण रखने के लिए नियम तय किए हैं। आजाद मैदान में केवल पांच वाहन और अधिकतम 5,000 प्रदर्शनकारियों को ही अनुमति दी गई है। सुरक्षा बनाए रखने के लिए 1,500 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।
रेलवे पुलिस ने भी छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस पर सुरक्षा कड़ी कर दी है। इसके बावजूद जरांगे के कई समर्थक स्टेशन और फुटपाथों पर शरण लिए हुए हैं।
प्रदर्शनकारियों का आक्रोश
नांदेड़ के किसान मारुति पाटिल ने कहा, “अगर हमें आरक्षण नहीं मिल सकता तो हमें जीना नहीं है। सरकार को गोली मारने का आदेश दे देना चाहिए।” उनके बयान को अन्य समर्थकों ने भी दोहराया और कहा कि जब तक मराठा आरक्षण लागू नहीं होता, वे मैदान नहीं छोड़ेंगे।
समर्थकों की नाराजगी
बीड जिले के उद्धव निंबालकर ने कहा कि अगर इस आंदोलन का नेतृत्व कोई बड़ा नेता कर रहा होता, तो प्रशासन पंडाल और शेड बना देता। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार को तुरंत आरक्षण पर फैसला करना होगा। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को आंदोलन की गंभीरता समझनी चाहिए।