अम्बिकापुर जिले के मैनपाट वन परिक्षेत्र में जंगली हाथियों की गतिविधियां लगातार ग्रामीण क्षेत्रों के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं। ताजा घटना कंडराज क्षेत्र के बरडाढ़ गांव से सामने आई है, जहां देर रात 14 हाथियों के दल ने गांव में प्रवेश कर व्यापक नुकसान पहुंचाया। हाथियों के हमले में कई ग्रामीणों के घर क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि खेतों में तैयार फसलें भी बर्बाद हो गईं। घटना के बाद पूरे गांव में भय और असुरक्षा का वातावरण बना हुआ है।
ग्रामीणों के अनुसार हाथियों का दल देर रात जंगल से निकलकर सीधे आबादी वाले हिस्से में पहुंचा। इस दौरान हाथियों ने चार घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया। घरों में रखे धान और अन्य खाद्यान्न को हाथियों ने खा लिया, जिससे प्रभावित परिवारों को आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अचानक हुए इस घटनाक्रम के कारण लोग अपने घरों से बाहर निकलने को मजबूर हो गए।
हाथियों के दल ने गांव से लगे कृषि क्षेत्रों में भी भारी नुकसान पहुंचाया। मक्का और टमाटर की फसलों को बड़े पैमाने पर रौंद दिया गया। कई किसानों ने बताया कि फसल कटाई का समय नजदीक था और उन्हें अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन हाथियों के प्रवेश से पूरी मेहनत प्रभावित हो गई। ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र मुआवजा और सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है।
मैनपाट क्षेत्र में हाथियों की लगातार बढ़ती आवाजाही ने वन विभाग के सामने भी चुनौती खड़ी कर दी है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ समय से हाथियों के दल नियमित रूप से गांवों की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे रात के समय लोगों को जागकर पहरा देना पड़ रहा है। कई परिवार बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर भी चिंतित हैं।
वन विभाग की टीम द्वारा प्रभावित गांवों का निरीक्षण किए जाने की जानकारी मिली है। विभागीय अधिकारियों ने ग्रामीणों को सतर्क रहने तथा हाथियों के दल से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है। साथ ही हाथियों की गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए वनकर्मियों की तैनाती बढ़ाई गई है। प्रशासनिक स्तर पर नुकसान का आकलन कर राहत प्रक्रिया शुरू किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
स्थानीय नागरिकों ने वन विभाग से स्थायी समाधान की मांग करते हुए हाथियों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में निगरानी तंत्र मजबूत करने तथा सुरक्षा उपायों को प्रभावी बनाने की आवश्यकता बताई है।