भारतीय संसदीय प्रणाली में व्यापक संरचनात्मक परिवर्तन की दिशा में केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा परिसीमन 2026 के तहत तीन महत्वपूर्ण विधेयक प्रस्तुत किए जाने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। संसद के विशेष सत्र में इन प्रस्तावित विधेयकों पर लगभग 18 घंटे की विस्तृत चर्चा निर्धारित की गई है, जो देश की विधायी संरचना एवं चुनावी परिदृश्य को प्रभावित कर सकती है।
प्रस्तावित संशोधनों के अंतर्गत लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों को बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही सरकार गठन के लिए आवश्यक बहुमत का आंकड़ा भी परिवर्तित होकर 426 हो जाएगा। यह परिवर्तन आगामी 2029 के आम चुनावों के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे राजनीतिक दलों की रणनीतियों एवं गठबंधन समीकरणों में व्यापक बदलाव संभव है।
सरकार का मुख्य उद्देश्य ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना है। प्रस्ताव के अनुसार, विस्तारित लोकसभा में लगभग 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जा सकती हैं, जिससे संसद में महिला प्रतिनिधित्व को सुदृढ़ किया जा सके। यह पहल लोकतांत्रिक भागीदारी के विस्तार के रूप में देखी जा रही है।
तीन प्रमुख विधेयकों में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के माध्यम से सीटों की अधिकतम संख्या निर्धारित की जाएगी। परिसीमन विधेयक, 2026 के अंतर्गत निर्वाचन क्षेत्रों की नई सीमाओं का निर्धारण किया जाएगा, जबकि केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 के जरिए केंद्र शासित प्रदेशों में सीटों का पुनर्गठन एवं आरक्षण लागू किया जाएगा।
प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार, सीटों का पुनर्वितरण नवीनतम जनगणना आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा, जिससे उन राज्यों में सीटों की संख्या बढ़ सकती है, जहां जनसंख्या वृद्धि दर अधिक रही है। इस संदर्भ में उत्तर भारत के राज्यों में सीटों में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना व्यक्त की जा रही है।
हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा भिन्न-भिन्न दृष्टिकोण सामने आए हैं। कुछ दलों ने इसे संरचनात्मक सुधार की दिशा में आवश्यक कदम बताया है, जबकि अन्य ने इसके संभावित प्रभावों पर विस्तृत चर्चा की आवश्यकता पर बल दिया है।