प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत कृषि क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों के कारण जशपुर मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव पी. अंबलगन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जिले की समीक्षा करते हुए इसे प्रभावी और किसान हितैषी मॉडल बताया। उन्होंने कहा कि जशपुर प्रशासन द्वारा तैयार की गई रणनीति कृषि विकास, जल संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिणाम देने की क्षमता रखती है।
कृषि विविधीकरण को मिल रही नई दिशा
जिले की कार्ययोजना में जशपुर मॉडल के तहत सुगंधित और औषधीय फसलों के क्लस्टर विकास, संविदा खेती और जीराफूल धान के रकबे में विस्तार को प्राथमिकता दी गई है। इसके अलावा निर्यात योग्य धान क्लस्टर, सामुदायिक बीज बैंक और कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन जैसी योजनाएं भी शामिल हैं। इन पहलों का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर अधिक लाभकारी कृषि गतिविधियों से जोड़ना है।
आधुनिक तकनीक से खेती होगी मजबूत
कृषि क्षेत्र में तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए जशपुर मॉडल में ड्रोन आधारित कृषि सेवाएं और कस्टम हायरिंग सेंटर की व्यवस्था शामिल की गई है। इससे किसानों को आधुनिक उपकरणों और तकनीकों का लाभ मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक आधारित खेती से उत्पादन लागत कम होगी और फसलों की गुणवत्ता एवं उत्पादकता में सुधार आएगा।
जल संरक्षण बना विकास की मजबूत नींव
समीक्षा बैठक में जल संचय जनभागीदारी अभियान के तहत किए जा रहे कार्यों की भी सराहना की गई। जशपुर मॉडल के अंतर्गत विभिन्न विभागों के समन्वय से जल संरक्षण और भू-जल संवर्धन के प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और कृषि उत्पादन की स्थिरता के लिए जल संरक्षण सबसे महत्वपूर्ण आधार है।
किसानों की आय बढ़ाने का दीर्घकालिक रोडमैप
केंद्र सरकार ने माना कि जशपुर मॉडल केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है बल्कि किसानों की आय में स्थायी वृद्धि पर भी केंद्रित है। प्राकृतिक खेती, एफपीओ सशक्तिकरण, कृषि यंत्रीकरण और बेहतर बाजार संपर्क जैसी योजनाओं से किसानों को अतिरिक्त लाभ मिलेगा। यही कारण है कि जशपुर की यह पहल अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रही है।
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