इंडिगो की लगातार बढ़ती फ्लाइट कैंसिलेशन और देरी की घटनाओं पर दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे एक गंभीर राष्ट्रीय संकट करार दिया है। कोर्ट ने कड़े शब्दों में पूछा कि आखिर देश की सबसे बड़ी एयरलाइन की स्थिति इतनी खराब कैसे हो गई कि हजारों यात्रियों को परेशानी और उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि इंडिगो की उड़ानें बंद होने का असर सिर्फ यात्रियों पर नहीं पड़ा, बल्कि इससे अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचा है। अदालत ने यह भी पूछा कि जब इंडिगो की उड़ानें रद्द थीं, तब अन्य एयरलाइंस ने टिकटों के दाम बढ़ाकर मौके का लाभ क्यों उठाया। ऐसी स्थिति में किराया बढ़ाने को अदालत ने अनुचित और असंवेदनशील बताया।
केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि इंडिगो के खिलाफ कानूनी कार्यवाही जारी है और एयरलाइन को शो-कॉज नोटिस जारी किया जा चुका है। सरकार ने यह भी कहा कि इंडिगो ने अपनी चूक स्वीकार करते हुए माफी मांगी है और स्थिति सुधारने का आश्वासन दिया है।
इस बीच, इंडिगो का संकट नौवें दिन भी जारी है। लगभग 2300 दैनिक उड़ानें संचालित करने वाली और 60% से अधिक घरेलू मार्केट शेयर वाली इस एयरलाइन का मार्केट कैप करीब 21,000 करोड़ रुपये तक गिर चुका है। दिल्ली, अहमदाबाद और मुंबई जैसे प्रमुख एयरपोर्टों पर यात्रियों को फ्लाइट देरी और कैंसिलेशन के कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।