हुमा कुरैशी नेटफ्लिक्स फिल्म ‘बेबी डू डाई डू’ रिव्यू

हुमा कुरैशी नेटफ्लिक्स फिल्म बेबी डू डाई डू का दृश्य

जुलाई में थिएटर में आई एक फिल्म को तब बहुत कम दर्शक मिल पाए थे. अब वही फिल्म ओटीटी पर लौटी है. हुमा कुरैशी नेटफ्लिक्स फिल्म ‘बेबी डू डाई डू’ 23 सितंबर से स्ट्रीम हो रही है. इसमें हुमा एक ऐसी हत्यारी बनी हैं जो न सुन सकती है, न बोल सकती है. सवाल यह है कि क्या यह फिल्म घर की स्क्रीन पर अपना असर छोड़ पाती है.

हुमा कुरैशी का खामोश किरदार

‘बेबी डू डाई डू’ बदले की एक चमकदार, तेज़ और थोड़ी सनकी थ्रिलर है. हुमा कुरैशी का खामोश किरदार फिल्म की रीढ़ है. लेखन हर जगह उतना मज़बूत नहीं है और क्लाइमैक्स का अंदाज़ा लग सकता है. फिर भी अलग तरह का सिनेमा देखने वालों के लिए यह 3 स्टार की ठीक-ठाक पेशकश है.

फिल्म से जुड़े ज़रूरी तथ्य

  • नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीमिंग 23 सितंबर 2026 से शुरू हुई.
  • थिएटर रिलीज़ 3 जुलाई 2026 को हुई थी.
  • निर्देशन नचिकेत सामंत का है.
  • हुमा कुरैशी, सिकंदर खेर और चंकी पांडे मुख्य भूमिकाओं में हैं.
  • फिल्म करीब 123 मिनट की है.
  • इसी फिल्म से हुमा कुरैशी ने प्रोड्यूसर के रूप में शुरुआत की है.

कहानी की झलक

बचपन में दो जुड़वां बहनें एक खाली पड़े होटल में कुछ ऐसा देख लेती हैं, जो उन्हें नहीं देखना चाहिए था. इस घटना में एक बहन की मौत हो जाती है. बची हुई लड़की को एक रहस्यमयी आदमी अपना लेता है.

बड़ी होकर बेबी एक पेशेवर कॉन्ट्रैक्ट किलर बन जाती है. उसका हथियार एक खास छाता है. मुंबई की भीड़ में वह चुपचाप काम करती है और गायब हो जाती है. उसका एक ही मकसद है: बहन के कातिल को ढूंढना.

इसी दौरान एक भोला-भाला पड़ोसी उसकी ज़िंदगी में आता है. एक पुलिस अफसर भी उसके पीछे लग जाती है. आगे के मोड़ बताना दर्शकों का मज़ा खराब करेगा.

हुमा कुरैशी नेटफ्लिक्स फिल्म में क्यों छाई हैं

इशारों से गढ़ा गया किरदार

पूरी फिल्म में हुमा का किरदार एक भी शब्द नहीं बोलता. वह इशारों, होंठ पढ़ने और टेक्स्ट मैसेज से बात करती है. इसके बावजूद दर्शक उसके दर्द और गुस्से से जुड़ जाते हैं. यह हुमा के करियर के सबसे अलग किरदारों में गिना जा सकता है.

सह-कलाकारों का योगदान

चंकी पांडे ने ‘पापा’ के किरदार में अपनी कॉमिक छवि से बिल्कुल अलग काम किया है. सिकंदर खेर का खलनायक डर पैदा करता है. सीमा पाहवा की पुलिस अफसर वाली भूमिका फिल्म में ताज़गी लाती है. रचित सिंह का सीधा-सादा किरदार कहानी को भावनात्मक संतुलन देता है.

निर्देशन, लुक और संगीत

नचिकेत सामंत ने मुंबई को एक अलग रंग में दिखाया है. पुरानी चॉलें, लोकल ट्रेन और रात की सड़कें फिल्म का माहौल बनाती हैं. कई समीक्षकों ने कहा कि यहां शहर खुद एक किरदार बन गया है.

बैकग्राउंड म्यूज़िक और गाने कहानी की रफ्तार के साथ चलते हैं. एक्शन सीन ज़मीनी और कच्चे लगते हैं, ज़्यादा चमक-दमक वाले नहीं.

कमियां जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता

बदले की कहानी का मूल ढांचा पहले भी कई बार देखा गया है. कुछ हिस्सों में कहानी उलझती है. आखिरी सच जिस तरह सामने आता है, उसका अंदाज़ा ध्यान से देखने वाले दर्शक पहले लगा लेंगे.

थिएटर रिलीज़ के वक्त भी समीक्षकों की राय बंटी थी. ज़्यादातर ने 3 से 3.5 स्टार दिए. एक-दो समीक्षकों ने इसे कमज़ोर लेखन वाली फिल्म भी कहा.

किन दर्शकों के लिए है यह फिल्म

यह फिल्म वयस्क दर्शकों के लिए है. इसमें हिंसा और खून-खराबे वाले दृश्य हैं. बच्चों के साथ बैठकर देखने की सलाह नहीं दी जा सकती.

अगर आपको डार्क थ्रिलर, दमदार महिला किरदार और स्टाइलिश एक्शन पसंद है, तो यह फिल्म आपके लिए है. हल्की कॉमेडी चाहने वालों को इस हफ्ते दूसरे विकल्प देखने चाहिए.

थिएटर से ओटीटी तक का सफर

रिपोर्ट्स के अनुसार फिल्म को रिलीज़ के समय पर्याप्त स्क्रीन नहीं मिल पाई थी. बड़ी फिल्मों की भीड़ में यह दब गई. कई दर्शकों ने सोशल मीडिया पर शिकायत की थी कि उन्हें शो नहीं मिल रहे.

ओटीटी ऐसी फिल्मों को दूसरा मौका देता है. छत्तीसगढ़ के छोटे शहरों में, जहां ऐसी फिल्में कम सिनेमाघरों में लगती हैं, दर्शक अब इसे आराम से देख सकते हैं.

घर पर देखने के लिए छोटे सुझाव

फिल्म का बड़ा हिस्सा रात में और कम रोशनी में शूट हुआ है. मोबाइल पर देख रहे हों तो कमरे की रोशनी हल्की रखें. इससे दृश्य साफ दिखेंगे. बेबी का किरदार कई जगह टेक्स्ट मैसेज से बात करता है, इसलिए स्क्रीन पर ध्यान बनाए रखें. पूरी फिल्म एक बार में देखना बेहतर रहेगा, क्योंकि रहस्य की कड़ियां आपस में जुड़ी हुई हैं. बीच में रोकने से तनाव का असर कम हो सकता है.

यह सफर मज़ेदार लगेगा

‘बेबी डू डाई डू’ एक ऐसी फिल्म है जो अपनी कमियों के बावजूद याद रहती है. हुमा कुरैशी के शानदार अभिनय के लिए इसे देखा जाना चाहिए. पूरी तरह चौंकाने वाले रहस्य की उम्मीद न रखें, तो यह सफर मज़ेदार लगेगा.

अस्वीकरण: यह समीक्षा लेखक की व्यक्तिगत राय पर आधारित है. हर दर्शक का अनुभव अलग हो सकता है. रिलीज़ से जुड़ी जानकारी प्रकाशन तिथि तक उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से ली गई है.

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