जनरल उपेंद्र द्विवेदी रिटायरमेंट पर धीरज सेठ ने संभाली सेना की कमान

General Upendra Dwivedi

जनरल उपेंद्र द्विवेदी रिटायरमेंट के साथ भारतीय थल सेना को नया नेतृत्व मिल गया है। लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने सेना प्रमुख का कार्यभार संभाल लिया है। विदाई समारोह में जनरल द्विवेदी ने अपने लंबे सैन्य सफर को याद करते हुए कहा कि भारतीय सेना की वर्दी पहनकर देश की सेवा करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान और सौभाग्य रहा।

विदाई से पहले शहीदों को दी श्रद्धांजलि

जनरल उपेंद्र द्विवेदी रिटायरमेंट से पहले नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पहुंचकर उन्होंने शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद आयोजित समारोह में उन्होंने सैनिकों, पूर्व सैनिकों, उनके परिवारों और देशवासियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सेना की वास्तविक ताकत उसके जवानों और देश के विश्वास में निहित है।

अपने कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों का किया उल्लेख

विदाई भाषण के दौरान जनरल द्विवेदी ने बताया कि पिछले दो वर्षों में भारतीय सेना ने उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर पूरी सतर्कता और मजबूती के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। उन्होंने ऑपरेशन स्नो लेपर्ड और ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि इन अभियानों ने भारतीय सेना की परिचालन क्षमता और प्रतिबद्धता को मजबूत किया।

तीनों सेनाओं के संयुक्त संचालन पर दिया जोर

जनरल उपेंद्र द्विवेदी रिटायरमेंट के अवसर पर उन्होंने भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों पर भी अपने विचार रखे। उनके अनुसार आने वाले समय में युद्ध का स्वरूप संयुक्त और थिएटर आधारित होगा। इसलिए सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच समन्वय और साझा रणनीति भारत की सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बनेगी।

धीरज सेठ को लेकर क्या बोले जनरल द्विवेदी?

कार्यभार सौंपते हुए जनरल द्विवेदी ने लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ की नेतृत्व क्षमता पर पूरा विश्वास जताया। उन्होंने कहा कि धीरज सेठ अनुभवी सैन्य अधिकारी हैं और उनके नेतृत्व में भारतीय सेना अपनी पेशेवर उत्कृष्टता, अनुशासन और रणनीतिक मजबूती को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी। जनरल उपेंद्र द्विवेदी रिटायरमेंट के साथ उन्होंने सेना के भविष्य को सुरक्षित हाथों में बताया।

कौन हैं लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ?

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) के पूर्व छात्र हैं और वर्ष 1986 में आर्मर्ड कोर में कमीशन प्राप्त किया था। चार दशक से अधिक के सैन्य अनुभव के दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों का नेतृत्व किया, कई महत्वपूर्ण सैन्य कमांड संभालीं और भारतीय सेना के आधुनिकीकरण से जुड़े अहम पदों पर कार्य किया।

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