रायपुर, 5 नवंबर 2026। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका ने जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) की राशि का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास और स्थानीय निवासियों के जीवन स्तर में सुधार के लिए करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने पर्यावरण प्रदूषण पर नियंत्रण को सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकता बताते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य और अधोसंरचना से जुड़े कार्यों पर भी विशेष ध्यान देने को कहा। राज्यपाल ने प्रभावी डीएमएफ की कार्ययोजना तैयार कर उसके सुनियोजित क्रियान्वयन पर जोर दिया।
दो वर्ष का रोडमैप तैयार करने के निर्देश
लोकभवन में आयोजित बैठक में राज्यपाल ने डीएमएफ की गतिविधियों, खनन प्रभावित क्षेत्रों में जारी विकास कार्यों और आगामी पांच वर्षों की योजना की समीक्षा की। उन्होंने डीएमएफ की राशि के बेहतर उपयोग के लिए कम से कम दो वर्ष का रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए। साथ ही पर्यावरण संरक्षण के लिए विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों का सहयोग लेने तथा उद्योगों से चर्चा कर पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करने को कहा।
रेत उत्खनन में अपनाएं वैज्ञानिक तरीके
राज्यपाल ने नदियों से रेत निकालने के दौरान वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल तरीकों को अपनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि रेत और पानी का संरक्षण एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। इसके लिए रेत खदानों में निर्धारित नियमों के अनुरूप उत्खनन सुनिश्चित करने और विशेष अभियान चलाने पर भी बल दिया।
जनता की जरूरतों के अनुसार बनेगी डीएमएफ की कार्ययोजना
राज्यपाल श्री डेका ने कलेक्टरों को आम नागरिकों से संवाद कर उनकी आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं को समझने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय जरूरतों के आधार पर डीएमएफ की कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए। विकास कार्यों में जनप्रतिनिधियों की सहभागिता सुनिश्चित करने के साथ नियमित बैठकें आयोजित कर योजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी की जाए।
बस्तर में विकास और पुनर्वास कार्यों को प्राथमिकता
राज्यपाल ने बस्तर क्षेत्र में डीएमएफ के माध्यम से होने वाले विकास कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने को कहा। उन्होंने मुख्यधारा में लौटे लोगों को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने, उनके पुनर्वास और सामाजिक सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। साथ ही खनन प्रभावित क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने पर जोर दिया।
विशेष पिछड़ी जनजातियों के स्वास्थ्य पर ध्यान देने के निर्देश
राज्यपाल ने खनन प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाली विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए विशेष चिकित्सा शिविर आयोजित करने और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता कार्यक्रम चलाने को कहा। उन्होंने समुदायों की जरूरतों के अनुरूप योजनाएं बनाने और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया। इन प्राथमिकताओं को डीएमएफ की कार्ययोजना में उचित स्थान देने के निर्देश भी दिए।
विकास कार्यों की गुणवत्ता और सत्यापन पर जोर
राज्यपाल ने कहा कि डीएमएफ के तहत मनरेगा की तर्ज पर उपयोगी परिसंपत्तियों का निर्माण किया जाना चाहिए। साथ ही निर्मित परिसंपत्तियों का भौतिक सत्यापन भी हो, ताकि स्वीकृत कार्यों की वास्तविक स्थिति और उनसे मिल रहे लाभ का आकलन किया जा सके। उन्होंने विस्थापित परिवारों को भी शासन की योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश दिए।
डीएमएफ पोर्टल 2.0 से होगी परियोजनाओं की निगरानी
बैठक में खनिज विभाग के सचिव श्री पी. दयानंद ने राज्यपाल को डीएमएफ की गतिविधियों और विकास कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डीएमएफ पोर्टल 2.0 के माध्यम से प्रत्येक परियोजना और कार्य का विवरण उपलब्ध है। इस पोर्टल से कार्यों की स्थिति और प्रगति की निगरानी भी की जा रही है।
बैठक में राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, खनिज विभाग के अधिकारी और खनन प्रभावित विभिन्न जिलों के कलेक्टर उपस्थित रहे। बैठक में तय प्राथमिकताओं के अनुरूप डीएमएफ की कार्ययोजना के जरिए खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास और जनकल्याण के कार्यों को आगे बढ़ाने पर बल दिया गया।
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