Delhi Pollution Update: 500 के पार पहुंचा वायु प्रदूषण सूचकांक

दिल्ली की हवा एक बार फिर ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच चुकी है। इस सीजन में पहली बार वायु प्रदूषण सूचकांक (AQI) ने 500 का आंकड़ा पार कर लिया है। झिलमिल इलाके में पीएम 2.5 का स्तर 512 और आनंद विहार में 501 दर्ज किया गया। वहीं मदर डेयरी क्षेत्र में पीएम 2.5 का स्तर 448 और पीएम 10 का स्तर 564 तक पहुंच गया। आईटीओ पर भी प्रदूषण का स्तर बेहद खतरनाक 381 पर रिकॉर्ड किया गया।

कृत्रिम वर्षा और अन्य उपायों के बावजूद दिल्ली की जहरीली हवा से राहत की फिलहाल कोई उम्मीद नहीं है। मौसम विभाग के अनुसार, हवा की गति दो से तीन किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक नहीं हो रही है, जिसके कारण प्रदूषणकारी तत्व राजधानी की सीमा से बाहर नहीं जा पा रहे। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले एक सप्ताह तक हालात ऐसे ही बने रह सकते हैं।

वाहनों और पराली का दोहरा असर:

दिल्ली के प्रदूषण में इस बार भी पराली जलाने की घटनाओं ने बड़ा योगदान दिया है। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के खेतों से उठता धुआं दिल्ली की हवा में ज़हर घोल रहा है। वहीं स्थानीय स्तर पर वाहनों से निकलने वाला धुआं भी प्रदूषण का मुख्य कारण बना हुआ है। इस बार सरकार ने वाहनों पर कोई अतिरिक्त रोक नहीं लगाई है, जिससे प्रदूषण के स्तर पर असर पड़ा है।

अस्पतालों में बढ़े मरीज, चिकित्सकों की चेतावनी:

दिल्ली में सांस की बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की संख्या में तेज़ी से इजाफा हुआ है। खासकर बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए यह हवा बेहद खतरनाक साबित हो रही है।
डॉ. प्रदीप कुमार बरनवाल ने सलाह दी है कि इस मौसम में लोग यथासंभव घर के अंदर रहें, और बाहर निकलने पर एन95 मास्क का प्रयोग करें। मेट्रो या बंद कैब में सफर करने की सलाह दी गई है ताकि बाहरी हवा से संपर्क कम से कम हो।

ट्रांसपोर्ट संगठनों की मांग — ‘सरकार करे वास्तविक अध्ययन’:

व्यावसायिक वाहनों से जुड़े संगठनों का कहना है कि इस समय ट्रकों की आवाजाही पहले से बहुत कम है। त्योहारों के कारण कई ड्राइवर और मजदूर दिल्ली से बाहर हैं, फिर भी प्रदूषण का स्तर 400-500 अंक पर बना हुआ है।
ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेन्द्र कपूर ने कहा कि सरकार को प्रदूषण के सभी संभावित स्रोतों — जैसे निर्माण कार्य, धूल, कचरा प्रबंधन, बायोमास जलाना और जनरेटरों के उपयोग — पर निष्पक्ष अध्ययन करना चाहिए। केवल वाहनों को जिम्मेदार ठहराना वैज्ञानिक दृष्टिकोण से उचित नहीं है।

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