छत्तीसगढ़ की खेती अब पारंपरिक धान उत्पादन तक सीमित नहीं रही है। कृषि बदलाव के साथ किसान नई फसलों और तकनीकों को अपना रहे हैं। इससे उत्पादन बढ़ने के साथ आय के नए रास्ते भी खुले हैं। अदरक, फूलों की खेती, बागवानी और मछली पालन इसके उदाहरण हैं।
आधुनिक खेती से आ रहा कृषि बदलाव
राज्य में किसान अब खेती को आय के कई स्रोतों से जोड़ रहे हैं। युवा किसान बागवानी के साथ मछली और मुर्गी पालन भी कर रहे हैं। वहीं, ड्रोन और आधुनिक कृषि मशीनों का इस्तेमाल बढ़ रहा है।
इससे खेती में समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है। कृषि बदलाव का असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, खरीफ फसलों के उत्पादन में करीब 17 प्रतिशत वृद्धि हुई है। रबी फसलों के उत्पादन में लगभग 20 प्रतिशत बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
फसल विविधीकरण को मिल रहा बढ़ावा
धान छत्तीसगढ़ की प्रमुख फसल है। इसके बावजूद सरकार दूसरी फसलों को बढ़ावा दे रही है। किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रति एकड़ 15 हजार रुपये तक प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
कृषि बदलाव से बढ़े कमाई के विकल्प
प्रोत्साहन के दायरे में कई दलहन और तिलहन फसलें शामिल हैं। किसान अरहर, मूंग, उड़द और चना उगा सकते हैं। इसके अलावा सोयाबीन, मूंगफली और सूरजमुखी को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
मक्का, कपास और मोटे अनाजों की खेती को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। इससे किसानों के लिए आय के नए विकल्प तैयार हो रहे हैं।
किसान योजनाओं से मिल रही आर्थिक सुरक्षा
कृषक उन्नति योजना के तहत किसानों को बड़ी आर्थिक सहायता मिली है। खरीफ 2023 से 2025 तक करीब 25.52 लाख किसानों को सहायता दी गई। इनके खातों में 35,892.90 करोड़ रुपये से अधिक ट्रांसफर किए गए।
धान पर आदान सहायता के तहत 24,73,762 किसानों को 13,289 करोड़ रुपये मिले। वहीं, गन्ना प्रोत्साहन योजना के तहत 32,955 किसानों को 64.95 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत भी किसानों को सीधे आर्थिक सहायता मिल रही है। राज्य के 24.63 लाख किसानों को 23वीं किस्त में 493 करोड़ रुपये मिले।
तकनीक और बागवानी से नई संभावनाएं
गांवों में फार्म मशीनरी बैंक छोटे किसानों के लिए उपयोगी साबित हो रहे हैं। यहां से किसान महंगी कृषि मशीनें किराये पर ले सकते हैं।
सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों का भी विस्तार किया जा रहा है। ड्रिप और स्प्रिंकलर से पानी की बचत हो रही है। प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों की संख्या भी बढ़ी है।
बागवानी क्षेत्र में भी कृषि बदलाव स्पष्ट नजर आ रहा है। राज्य में बागवानी का रकबा 8.42 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 8.91 लाख हेक्टेयर हुआ है।
फल, सब्जी, मसाले और फूलों की खेती को विस्तार मिल रहा है। तेल पाम और बांस जैसी फसलें भी नई संभावनाएं पैदा कर रही हैं।
आने वाले समय में उत्पादन के साथ बाजार और प्रसंस्करण पर जोर जरूरी होगा। पैक हाउस और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस जैसी सुविधाएं इसमें मददगार हो सकती हैं। इस तरह कृषि बदलाव किसानों को बेहतर बाजार और मूल्य से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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