अफगानिस्तान भूकंप संकट: जान-माल की हानि और भारत की मदद

अफगानिस्तान में रविवार रात को भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए, जिनकी तीव्रता 6 रिक्टर स्केल पर मापी गई। भूकंप से लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और भय का माहौल बन गया। शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 800 से अधिक लोगों की मौत हुई है, जबकि 2500 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं।

भारत ने इस संकट के समय मदद के हाथ बढ़ाए हैं। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में आए विनाशकारी भूकंप पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और पीड़ितों के लिए हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। प्रधानमंत्री डॉ. नरेंद्र मोदी ने भी शोक व्यक्त करते हुए राहत कार्य में भारत की तत्परता की जानकारी दी।

भूकंप का केंद्र नांगरहार प्रांत के जलालाबाद के पास 8 किलोमीटर की गहराई में था। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार, रात 11:47 बजे आया यह भूकंप काफी शक्तिशाली था। 20 मिनट बाद उसी प्रांत में दूसरा भूकंप आया, जिसकी तीव्रता 4.5 मापी गई।

अफगानिस्तान भूकंप के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र है। पिछले एक महीने में यहां पांच बार भूकंप के झटके आए हैं। इससे पहले 27 अगस्त को 5.4, 17 अगस्त को 4.9, 13 अगस्त को 4.2 और 8 अगस्त को 4.3 तीव्रता के भूकंप आए थे।

भूकंप तब आता है जब पृथ्वी की 7 प्लेट्स टकराती हैं। लगातार दबाव बनने पर प्लेट्स टूटती हैं और पृथ्वी के अंदर की ऊर्जा बाहर निकलती है। इसी ऊर्जा के कारण धरती हिलती है और भूकंप के झटके महसूस होते हैं।

भूकंप का केंद्र उस स्थान को कहते हैं, जहां प्लेटों में हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। रिक्टर स्केल से भूकंप की तीव्रता मापी जाती है। यह स्केल 1 से 9 तक होती है और इसी से झटकों की भयावहता का अंदाजा लगाया जाता है।

भारत ने इस कठिन समय में अफगानिस्तान को राहत देने और पीड़ितों की मदद के लिए तत्पर रहने का आश्वासन दिया है। मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना व्यक्त की गई।

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