आम आदमी पार्टी (AAP) में बढ़ती अंदरूनी खींचतान के बीच राज्यसभा सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल ने बड़ा दावा करते हुए सियासी हलचल तेज कर दी है। उन्होंने खुलासा किया कि पार्टी छोड़ने वाले कुछ सांसदों ने उन्हें भी अपने साथ आने का न्योता दिया था, लेकिन उन्होंने इसे सिरे से खारिज कर दिया।
सीचेवाल ने कहा कि यह कदम पार्टी के प्रति निष्ठा के खिलाफ है। उन्होंने सात सांसदों के एक साथ पार्टी छोड़ने पर गहरी नाराजगी जताई और इसे “बेवफाई” करार दिया। उनका कहना है कि पार्टी ने इन नेताओं को राज्यसभा तक पहुंचाकर पंजाब के मुद्दों को उठाने का अवसर दिया, लेकिन उन्होंने अचानक अलग रास्ता चुन लिया।
उन्होंने राघव चड्ढा और संदीप पाठक जैसे वरिष्ठ नेताओं को लेकर भी हैरानी जताई और कहा कि इन नेताओं ने सत्ता का पूरा लाभ उठाने के बाद पार्टी से दूरी बना ली। इस घटनाक्रम ने पार्टी के अंदर चल रही असहमति को उजागर कर दिया है।
दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने अपने फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा कि वे “गद्दार” नहीं हैं, बल्कि अब पहले से दस गुना ज्यादा काम करेंगे। साहनी के अनुसार, पार्टी में लंबे समय से असंतोष था, खासकर राघव चड्ढा और संदीप पाठक को साइडलाइन किए जाने के बाद।
साहनी ने यह भी दावा किया कि उन्होंने इस मुद्दे को पार्टी नेतृत्व के सामने रखा था, लेकिन उन्हें इस्तीफा देने तक के लिए कहा गया। इसके बाद विचार-विमर्श कर उन्होंने भाजपा में शामिल होने का फैसला लिया, यह मानते हुए कि यही पंजाब के विकास के लिए बेहतर विकल्प है।
पंजाब की राजनीति में इस घटनाक्रम ने नए समीकरणों के संकेत दे दिए हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में इसका क्या असर पड़ता है।