बस्तर विकास मॉडल पर आदिवासी समाज: जल जंगल जमीन पर समझौता नहीं

बस्तर विकास मॉडल

छत्तीसगढ़ में केंद्रीय गृह मंत्री के बस्तर दौरे के दौरान बस्तर विकास मॉडल को लेकर नई बहस छिड़ गई है। सर्व आदिवासी समाज, बस्तर संभाग ने प्रेस नोट जारी कर विकास योजनाओं पर अपनी चिंताएं और मांगें सार्वजनिक कीं। समाज का कहना है कि बस्तर में विकास स्थानीय आदिवासी संस्कृति, परंपरा और संवैधानिक अधिकारों के अनुरूप होना चाहिए।

अमित शाह के दौरे के बीच आदिवासी समाज की प्रेस विज्ञप्ति

गृह मंत्री के दौरे के दौरान सर्व आदिवासी समाज ने कहा कि उन्हें अपनी बात सीधे रखने का अवसर नहीं मिला, इसलिए प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई। समाज ने स्पष्ट किया कि बस्तर विकास मॉडल ऐसा होना चाहिए जिसमें स्थानीय लोगों की भागीदारी और ग्रामसभा की सहमति अनिवार्य हो।

समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि विकास के नाम पर आदिवासी समुदाय का विस्थापन या प्राकृतिक संसाधनों पर उनका अधिकार खत्म नहीं होना चाहिए।

जल-जंगल-जमीन और ग्रामसभा की सहमति पर जोर

सर्व आदिवासी समाज ने कहा कि बस्तर लंबे समय से संघर्ष और हिंसा का सामना करता रहा है। ऐसे में शांति और विकास जरूरी हैं, लेकिन बस्तर विकास मॉडल में जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

समाज ने कहा कि किसी भी परियोजना को लागू करने से पहले ग्रामसभा की सहमति लेना जरूरी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसा कोई विकास स्वीकार नहीं होगा जिससे सामाजिक और सांस्कृतिक असंतुलन पैदा हो।

खनन परियोजनाओं और नई कैंप स्थापना का विरोध

प्रेस नोट में लौह अयस्क उत्खनन परियोजनाओं में निजी कंपनियों की भागीदारी समाप्त करने की मांग उठाई गई। इसके अलावा बोधघाट और नदी जोड़ो परियोजनाओं का भी विरोध किया गया।

सर्व आदिवासी समाज का कहना है कि बस्तर विकास मॉडल स्थानीय हितों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाना चाहिए। समाज ने अबूझमाड़ क्षेत्र में नए सैन्य और अर्धसैनिक शिविर स्थापित नहीं करने की भी मांग रखी।

संवैधानिक अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग

आदिवासी समाज ने पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 और वन अधिकार अधिनियम, 2006 को प्रभावी तरीके से लागू करने की मांग की। सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों को प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया गया।

समाज के अनुसार, बस्तर विकास मॉडल तभी सफल माना जाएगा जब आदिवासी समुदाय के संवैधानिक अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहें और विकास योजनाओं में उनकी सीधी भागीदारी सुनिश्चित हो।

स्थानीय भाषा, संस्कृति और रोजगार को प्राथमिकता देने की अपील

सर्व आदिवासी समाज ने स्थानीय युवाओं को सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता देने की मांग की। साथ ही स्कूलों और कॉलेजों को मजबूत करने की बात कही गई।

समाज ने जगदलपुर विधानसभा सीट को पुनः अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित करने तथा स्थानीय भाषा और संस्कृति के संरक्षण की भी मांग रखी। आदिवासी नेताओं का कहना है कि बस्तर विकास मॉडल में स्थानीय पहचान और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है।

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