आम आदमी पार्टी (AAP) इन दिनों बड़े राजनीतिक उथल-पुथल से गुजर रही है। पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। इसी घटनाक्रम के बीच पार्टी से अलग हुए बागी सांसदों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर अपनी चिंताओं और आरोपों को उनके सामने रखा। इस मुलाकात में पंजाब की कानून-व्यवस्था, सीमा पार से हो रही नशे और हथियारों की तस्करी जैसे गंभीर मुद्दों को उठाया गया।
बताया जा रहा है कि सांसदों ने राज्य के मौजूदा हालात और पार्टी के भीतर चल रहे विवादों की भी विस्तृत जानकारी राष्ट्रपति को दी। यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है जब पंजाब की राजनीति में अस्थिरता और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। बागी सांसदों के इस कदम को पार्टी नेतृत्व के खिलाफ एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।
वहीं दूसरी ओर, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान भी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सक्रिय नजर आए। वह अपने सभी विधायकों के साथ दिल्ली पहुंचे हैं और राष्ट्रपति से मुलाकात कर अपनी बात रखने की तैयारी में हैं। हालांकि, राष्ट्रपति भवन की ओर से केवल मुख्यमंत्री को ही मिलने की अनुमति दी गई है, जबकि अन्य विधायक बाहर ही प्रतीक्षा करेंगे। सीएम मान ने स्पष्ट किया है कि वह इस मुलाकात के दौरान पंजाब के हालातों से अवगत कराएंगे और ‘राइट टू रिकॉल’ जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर हस्तक्षेप की मांग भी करेंगे।
इस सियासी घटनाक्रम पर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सुनील जाखड़ ने भी तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को सतर्क रहना चाहिए, कहीं ऐसा न हो कि विधायकों से भरी बस भाजपा कार्यालय की ओर मुड़ जाए। उनके इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।
कुल मिलाकर, पंजाब की राजनीति इस समय एक अहम मोड़ पर खड़ी है, जहां एक ओर पार्टी के भीतर बगावत देखने को मिल रही है, वहीं दूसरी ओर सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है।