छत्तीसगढ़ में श्रमिक कल्याण को मिली नई पहचान,17.82 लाख श्रमिकों को लाभ

श्रमिक कल्याण

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने श्रमिक कल्याण को विकास की प्राथमिकताओं में शामिल किया है। पिछले ढाई वर्षों में श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक सशक्तिकरण और डिजिटल सेवाओं के विस्तार के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। इन पहलों का उद्देश्य श्रमिकों को योजनाओं का लाभ सरल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराना है।

श्रम एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन के मार्गदर्शन में श्रम विभाग ने तकनीकी नवाचार और प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से श्रमिक हितों को मजबूत करने का प्रयास किया है। इसका लाभ संगठित, असंगठित और निर्माण क्षेत्र के लाखों श्रमिकों को मिल रहा है।

श्रमिक कल्याण योजनाओं से लाखों परिवारों को मिला संबल

राज्य में विभिन्न श्रम कल्याण मंडलों के माध्यम से 67 योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। इन योजनाओं के तहत श्रमिकों के पंजीयन, सहायता और हितलाभ वितरण की प्रक्रिया को डिजिटल बनाया गया है।

1 जनवरी 2024 से 30 जून 2026 के बीच 12.65 लाख नए श्रमिकों का पंजीयन किया गया। वहीं 17.82 लाख से अधिक श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं का लाभ मिला। इस अवधि में 800 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि वितरित की गई।

डिजिटल व्यवस्था से श्रमिकों को मिली नई सुविधा

श्रमिक कल्याण को अधिक प्रभावी बनाने के लिए श्रमेव जयते पोर्टल और मोबाइल ऐप विकसित किया गया है। इसके माध्यम से श्रमिक अब ऑनलाइन पंजीयन, आवेदन और विभिन्न सेवाओं का लाभ घर बैठे प्राप्त कर सकते हैं।

डीबीटी प्रणाली लागू होने से सहायता राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में पहुंच रही है। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और भुगतान प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज हुई है।

श्रमिक कल्याण में सामाजिक सुरक्षा पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री श्रमिक सहायता केंद्र 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन संचालित किए जा रहे हैं। मोबाइल शिविरों के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों के श्रमिकों तक भी सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं।

मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना के तहत आवास सहायता राशि बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये कर दी गई है। मृत्यु सहायता, दिव्यांग सहायता, छात्रवृत्ति और शिक्षा सहायता जैसी योजनाओं ने हजारों परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है।

महिला श्रमिकों और बच्चों के लिए विशेष पहल

मिनीमाता महतारी जतन योजना के अंतर्गत 1.60 लाख से अधिक महिला श्रमिकों को मातृत्व सहायता दी गई है। वहीं शहीद वीरनारायण सिंह श्रम अन्न योजना के तहत पंजीकृत श्रमिकों को मात्र पांच रुपये में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति, मेधावी शिक्षा सहायता और प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग जैसी योजनाएं भी संचालित की जा रही हैं। इससे शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।

प्रशासनिक सुधार और रोजगार को बढ़ावा

राज्य के सभी 33 जिलों में श्रम कार्यालयों का संचालन सुनिश्चित किया गया है। नए जिलों में कार्यालय स्थापित करने के साथ विभागीय क्षमता भी बढ़ाई गई है। श्रम कानूनों में संशोधन, महिला श्रमिकों के लिए रात्रिकालीन कार्य की सुविधा और फिक्स्ड टर्म रोजगार जैसे फैसलों से रोजगार और श्रमिक अधिकार दोनों को मजबूती मिली है।

एक नजर में

  • 17.82 लाख श्रमिक लाभान्वित।
  • 12.65 लाख नए पंजीयन।
  • 800 करोड़ रुपये से अधिक सहायता।
  • 67 श्रमिक कल्याण योजनाएं संचालित।
  • 1.60 लाख महिला श्रमिकों को मातृत्व सहायता।
  • श्रमेव जयते पोर्टल और मोबाइल ऐप से डिजिटल सेवाएं।

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