छत्तीसगढ़ में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था इस समय गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। प्रदेश में हैंडपंपों की देखरेख और मरम्मत के लिए पर्याप्त तकनीशियन उपलब्ध नहीं हैं, जिससे गर्मी के मौसम में स्थिति और जटिल हो रही है।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के आंकड़ों के अनुसार राज्य में हैंडपंप टेक्नीशियन के 876 पद स्वीकृत हैं, जबकि वर्तमान में केवल 462 कर्मचारी कार्यरत हैं। यानी 400 से अधिक पद रिक्त हैं, जिससे कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है।
ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में हैंडपंप ही पेयजल का प्रमुख स्रोत हैं। ऐसे में तकनीशियनों की कमी के कारण खराब हैंडपंपों की मरम्मत में देरी हो रही है। एक तकनीशियन को औसतन 10 से 12 गांवों की जिम्मेदारी दी गई है, जिससे शिकायतों के समाधान में समय लग रहा है।
गर्मी के दिनों में जलस्तर गिरने के साथ-साथ पानी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए केमिकल डालने का कार्य भी प्रभावित हो रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट की स्थिति बन सकती है।
विशेषज्ञों और कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि बढ़ती जरूरतों को देखते हुए विभागीय सेटअप में संशोधन किया जाए और रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए।