ईरान का ‘मिसाइल-ड्रोन’ से होर्मुज जलडमरूमध्य को ब्लॉक करने की तैयारी

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अपने अत्याधुनिक सैन्य ढांचे की एक झलक दुनिया के सामने पेश की है। ईरान की सेना ने हाल ही में एक भूमिगत परिसर का वीडियो जारी किया, जिसे अधिकारियों ने ‘मिसाइल-ड्रोन शहर’ बताया है। इस परिसर में बड़ी संख्या में कामीकेज यानी आत्मघाती ड्रोन्स और जहाज रोधी मिसाइलों को देखा जा सकता है।

सरकारी मीडिया द्वारा जारी फुटेज में विशाल सुरंगों के भीतर नौसैनिक ड्रोन और हथियारों का बड़ा जखीरा दिखाई देता है। इन ड्रोन को यूएसवी (Unmanned Surface Vehicle) भी कहा जाता है, जो समुद्र की सतह या पानी के नीचे चलकर अपने लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ये ड्रोन विस्फोटकों से भरे होते हैं और लक्ष्य से टकराते ही धमाका कर देते हैं।

इन हथियारों को लेकर सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जताई जा रही है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। माना जा रहा है कि अगर ईरान इन कामीकेज ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है।

रिपोर्ट्स के अनुसार 1 मार्च को ओमान के तट के पास एक कच्चे तेल के टैंकर को भी इसी तरह के ड्रोन से निशाना बनाया गया था। इस हमले के बाद टैंकर में आग लग गई थी और चालक दल के एक सदस्य की मौत हो गई थी। इससे पहले भी फारस की खाड़ी में कई जहाजों पर ऐसे हमलों की खबरें सामने आ चुकी हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान के शाहेद या कामीकेज ड्रोन लंबी दूरी तक हमला करने में सक्षम हैं। ये ड्रोन करीब 2000 किलोमीटर तक विस्फोटक ले जा सकते हैं और लगभग 180 से 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भर सकते हैं। एक ड्रोन में करीब 40 से 50 किलो तक विस्फोटक लगाया जा सकता है। इनकी लागत भी अपेक्षाकृत कम होती है, जिससे इन्हें बड़ी संख्या में तैयार करना आसान हो जाता है।

अगर ईरान इन ड्रोन का इस्तेमाल कर होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को निशाना बनाता है, तो इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मच सकती है और दुनिया भर में तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

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