छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसांस्कृतिक परंपरा को नई पहचान दिलाने वाली प्रसिद्ध भरथरी लोकगायिका Suruj Bai Khande की पुण्यतिथि पर प्रदेशभर में उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया। इस अवसर पर Vishnu Deo Sai ने उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके अद्वितीय सांस्कृतिक योगदान को याद किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्गीय सुरुज बाई खांडे छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति और लोकगायन परंपरा की एक विशिष्ट पहचान थीं। अपनी मधुर आवाज़ और अद्भुत कला के माध्यम से उन्होंने भरथरी गायन परंपरा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया और राज्य की लोकधारा को देश-दुनिया तक पहचान दिलाई।
उन्होंने आगे कहा कि सुरुज बाई खांडे ने पारंपरिक लोककला को सहेजने और उसे नई पीढ़ी तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका समर्पण और साधना इस बात का उदाहरण है कि लोकसंस्कृति को जीवित रखने के लिए कलाकारों का योगदान कितना महत्वपूर्ण होता है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध बनाने में सुरुज बाई खांडे का योगदान मील का पत्थर है। उनके गीतों और लोकगायन ने न केवल लोगों के दिलों को छुआ, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत किया।
उन्होंने यह भी कहा कि उनकी कला, लोकपरंपरा के प्रति उनकी निष्ठा और सांस्कृतिक समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। प्रदेशवासी उनके अमूल्य योगदान को सदैव सम्मान और गर्व के साथ याद करते रहेंगे।