एपस्टीन फाइल्स से लेकर ट्रंप के दबाव तक सरकार पर सवाल

बुधवार, 11 फरवरी को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया। आम बजट 2026 पर चर्चा के दौरान उनका रुख बेहद आक्रामक नजर आया। उन्होंने बजट को मौजूदा समय की जरूरतों के लिए अपर्याप्त बताते हुए सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए।

अपने भाषण में राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका के हालिया व्यापार समझौते को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह समझौता भारत के हितों से समझौता करता है और देश की डिजिटल संप्रभुता को कमजोर करता है। उनके अनुसार, सरकार ने अमेरिका के दबाव में आकर भारत के डेटा और डिजिटल नियमों पर नियंत्रण छोड़ दिया है।

राहुल गांधी ने चर्चित एपस्टीन फाइल्स का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अभी भी 30 लाख से ज्यादा फाइलें सार्वजनिक नहीं की गई हैं, जिससे कई प्रभावशाली लोगों की भूमिका पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री पर अंतरराष्ट्रीय दबाव है, जो उनकी नीतियों में दिखाई देता है।

डिजिटल डेटा नीति पर बात करते हुए राहुल गांधी ने सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार ने:

डेटा लोकलाइजेशन के नियमों को ढीला कर दिया

भारतीय डेटा को अमेरिका में स्वतंत्र रूप से प्रवाहित होने दिया

डिजिटल टैक्स पर सीमाएं लगा दीं

बड़ी कंपनियों को सोर्स कोड साझा करने से छूट दी

प्रमुख टेक कंपनियों को लंबे समय तक टैक्स छूट देने की नीति अपनाई

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार अदाणी और अंबानी जैसे बड़े उद्योगपतियों के हितों को प्राथमिकता दे रही है, जबकि आम जनता की समस्याओं की अनदेखी कर रही है।

राहुल गांधी के इस भाषण के बाद सदन में तीखी बहस छिड़ गई, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर नोकझोंक हुई।

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